Saturday, 17 December 2016

नोटबंदी : कांग्रेस पर पीएम ने साधा निशाना, 1971 में हो जाना चाहिए था ये फैसला

नई दिल्ली (जेएनएन)। नोटबंदी के फैसले के बाद भारत की राजनीति में कई तरह के परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। एक दूसरे के ऊपर भ्रष्टाचार के आरोप लगाने वाले विपक्षी दलों ने न केवल सदन के भीतर बल्कि सड़क पर एकजुटता दिखाई। वे नेता जो एक दूसरे को फूंटी आंख नहीं सुहाते थे, वो गलबहियां करते नजर आए। सदन के भीतर और बाहर दोनों जगह विपक्षी दल नोटबंदी के मुद्दे पर पीएम के बहस में शामिल होने और जवाब की मांग करते रहे।

नोटबंदी पर शीतकालीन सत्र बर्बाद

सत्ता पक्ष की तरफ से जब ये कहा गया कि पीएम बहस के साथ-साथ जवाब देने के लिए तैयार हैं, बावजूद उसके विपक्षी नेताओं का हंगामा जारी रहा है। नोटबंदी पर जनसभाओं में पीएम के तेवर से बौखलाया विपक्ष कहा करता था कि जिस शख्स को संसद में अपनी बात कहनी चाहिए वो बाहर कहता रहता है। लेकिन शुक्रवार को भाजपा के सांसदों और मंत्रियों के बीच बोलते हुए पीएम ने सिलसिलेवार देश की आजादी से लेकर अब तक के किए गए प्रयासों को विस्तार से बताया। उन्होंने अपने भाषण में ये साफ कर दिया कि भाजपा ही सिर्फ एक ऐसी पार्टी है जिसके लिए देशहित ऊपर है, और दूसरी पार्टियों के लिए अपना हित देशहित से पहले आता है।

'1971 में होना चाहिए था नोटबंदी'

नोटबंदी के खिलाफ कांग्रेस के पुरानी मानसिकता की ओर इशारा करते हुए मोदी ने कहा कि 70 के दशक की शुरूआत में इंदिरा गांधी के प्रधानमंत्री रहते समय वांगचू समिति ने नोटबंदी की सिफारिश की थी।वांगचू समिति का कहना था कि इससे अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। लेकिन चुनावी मजबूरियों का हवाला देते हुए इंदिरा गांधी ने इसे ठुकरा दिया था। 45 साल बाद नोटबंदी हुई है और कांग्रेस फिर से इसका विरोध कर रही है। वामदलों ने भी कांग्रेस से हाथ मिला लिया है। कांग्रेस को भ्रष्टाचार के पक्षधर के रूप में पेश करते हुए मोदी ने कहा कि उसने 1988 में बेनामी सम्पत्ति संबंधी कानून बनाया लेकिन इसके नियमों एवं नियमन को अधिसूचित नहीं किया ताकि इसे प्रभावी बनाया जा सकता।

मनमोहन सिंह को यूं दिया जवाब

नोटबंदी का विरोध करने पर पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर निशाना साधते हुए मोदी ने कहा कि उन्होंने 1991 में भ्रष्टाचार और कालाधन के खिलाफ कड़े कदम उठाने की वकालत की थी लेकिन अपने 10 सालों के शासन के दौरान इसके लिए कुछ नहीं किया।

कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस के लिए पार्टी का हित देशहित से ऊपर है लेकिन भाजपा के लिए देश हित सर्वोच्च है। नोटबंदी का विरोध करने और कांग्रेस का पिछलग्गू बनने पर उन्होंने वामपंथी दलों को भी आड़े हाथों लिया। संप्रग काल में भाजपा के संसद में विरोध प्रदर्शनों को सही ठहराते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उस समय भ्रष्टाचार निष्पक्ष जांच और कालाधन के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई को लेकर विपक्ष संसद में विरोध प्रदर्शन करता था। लेकिन ऐसा पहली बार हुआ है कि जब सरकार के कालाधन को खत्म करने के फैसले के खिलाफ विपक्ष संसद को नहीं चलने दे रहा है। अंतर साफ है पहले सत्ता पक्ष घोटाला करता था और आज सत्ता पक्ष कालेधन के खिलाफ मुहिम चला रहा है। उन्होंने कहा कि 1971 में पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध के बाद सेना के पराक्रम का सबूत किसी ने नहीं मांगा और जबकि आज सर्जिकल स्ट्राइक का सबूत मांगा जा रहा है।

वाम दलों को पीएम ने कोसा

वामपंथी दलों के नोटबंदी का विरोध करने पर हैरानी जताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि दिग्गज वामपंथी नेता दिवंगत हरकिशन सिंह सुरजीत और ज्योति बसु हमेशा नोटबंदी की मांग का समर्थन करते थे। लेकिन अपने मूल सिद्धांतों से भटक गए वामपंथी दल कांग्रेस के साथ खड़ी है।

भाजपा सांसदों को नसीहत

प्रधानमंत्री ने भाजपा सांसदों को नसीहत देते हुए कहा कि नोटबंदी को लेकर जनता से सीधा संवाद करें। सभी सांसदों जनता को नोटबैन को फायदा बताना चाहिए। उन्हें लोगों को डिजिटल और कैशलेश ट्रांजेक्शन की जानकारी देने के काम में जुटना होगा। साथ ही सांसदों कैशलेस को खुद अपनी लाइफस्टाइल का हिस्सा बनाना चाहिए। ताकि धीरे-धीरे लोगों की जीवनशैली के रूप में डिजिटल अर्थव्यवस्था रच-बस जाए

Source:jagran.com

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