नई दिल्ली: प्रधानमंत्री ने जिस दिन 500 और 1,000 रुपये के नोटों पर पाबंदी लगाने की घोषणा की, उस दिन रिजर्व बैंक के पास 2,000 रुपये के 4.94 लाख करोड़ रुपये थे. यह पाबंदी लगाये गये लगभग 20 लाख करोड़ रुपये का एक चौथाई था.
मुंबई के कार्यकर्ता अनिल गलगाली को सूचना के अधिकार कानून के तहत रिजर्व बैंक से मिले जवाब के अनुसार आठ नवंबर को उसके पास 9.13 लाख करोड़ रुपये के 1,000 रुपये के नोट तथा 500 रुपये के 11.38 लाख करोड़ रुपये थे. केंद्रीय बैंक के अनुसार उसके पास आठ नवंबर को 2,000 रुपये के 247.3 करोड़ नोट थे जिसका मूल्य 4.94 लाख करोड़ रुपये था.
दिलचस्प बात यह है कि रिजर्व बैंक ने नौ नवंबर से 19 नवंबर के बीच बैंकों को मुद्रा के वितरण के बारे में आरटीआई कानून की धारा 8 (1) (जी) का हवाला देते हुए जानकारी देने से मना कर दिया. इस धारा के तहत सार्वजनिक प्राधिकरण जानकारी देने से मना कर सकता है क्योंकि इसके खुलासे किसी व्यक्ति का जीवन या सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है. रिजर्व बैंक ने इसका कोई कारण नहीं बताया कि कैसे यह धारा गलगाली द्वारा मांगी सूचना के मामले में लागू होगा.
जवाब में कहा गया है कि सभी कार्यालयों : करेंसी चेस्ट में नोटों की आपूर्ति तथा भंडार के बारे में सूचना नहीं दी जा सकती. इस बारे में सूचना के अधिकार कानून, 2005 के तहत धारा 8 (1) (जी) के तहत छूट प्राप्त है.
Source:abplive.in
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