Wednesday, 21 December 2016

जलवायु परिवर्तन से प्रभावित होगी हिंदुकुश-हिमालय में पानी की आपूर्ति

काठमांडू, आइएएनएस। हिंदुकुश-हिमालय (एचकेएच) क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन के चलते पानी की आपूर्ति और भूजल रिचार्ज पर प्रभाव पड़ेगा। एक अध्ययन में कहा गया है कि ग्लेशियर पिघलने से ज्यादा जलवायु परिवर्तन के चलते नदी और बर्फ के स्थान और तीव्रता में बदलाव इसका कारण होगा।

अध्ययन में कहा गया है कि निचली ऊंचाई पर ग्लेशियर पिघलने से अगले कुछ दशकों में पानी की उपलब्धता में बदलाव की संभावना कम है। लेकिन अन्य कारणों के चलते इस पर काफी प्रभाव पड़ सकता है। इनमें भूजल की कमी और लोगों द्वारा अधिक मात्रा में पानी का उपभोग शामिल है। अध्ययन के मुताबिक, ग्लेशियर का पिघलना मौजूदा दर से जारी रहा तो ऊंचाई वाले इलाके में कुछ नदियों के बहाव में बदलाव हो सकता है। काठमांडू स्थित इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट (आइसीआइएमओडी) के विशेषज्ञों अंजलि प्रकाश और अरुण बी. श्रेष्ठ ने यह अध्ययन किया है।

हिंदुकुश-हिमालय दुनिया में सबसे गतिशील, विभिन्नता वाला और जटिल पर्वत प्रणाली है। यहां कई नदियों और ग्लेशियरों के कारण इसे धरती का 'तीसरा धु्रव' कहा जाता है। इससे पहाड़ी क्षेत्रों में 21 करोड़ और मैदानी इलाकों में 1.3 अरब लोगों को पानी उपलब्ध होता है। वैज्ञानिक प्रमाण बताते हैं कि हिंदुकुश-हिमालय क्षेत्र के अधिकांश ग्लेशियर पिघल रहे हैं। लेकिन क्षेत्रीय जल प्रणाली खासकर भूजल पर इनके पिघलने के परिणाम के बारे में स्पष्ट नहीं है। अध्ययन में कहा गया है कि ग्लेशियर का पिघलना बढ़ने से शुरू में नदी जल में वृद्धि हो सकती है जिससे बाढ़ अधिक आ सकते हैं। लेकिन जब ग्लेशियर खत्म हो जाएंगे तब नदियों में पिघले बर्फ की मात्रा काफी कम हो जाएगी। इसके परिणामस्वरूप कुछ इलाकों में भूजल रिचार्ज की दर कम हो जाएगी।

Source:jagran.com

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