Wednesday, 21 December 2016

उम्रकैद में कठोर कारावास जोड़ने पर होगा विचार

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। उम्रकैद की सजा में कठोर कारावास दिया जा सकता है कि नहीं इस कानूनी पहलू पर सुप्रीमकोर्ट विचार करेगा। सुप्रीमकोर्ट ने इस कानूनी प्रश्न पर विचार का मन बनाते हुए छत्तीसगढ़ सरकार को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने सरकार से चार सप्ताह में जवाब मांगा है।

न्यायमूर्ति पीसी घोष व न्यायमूर्ति यूयू ललित की पीठ ने हत्या के जुर्म में उम्रकैद की सजा पाए राम कुमार सिवारे की विशेष अनुमति याचिका पर बहस के दौरान उठाए गए इस कानूनी मुद्दे पर सरकार को नोटिस जारी किया। वरिष्ठ वकील परमानंद कटारा ने उम्रकैदी को कठोर कारावास की सजा दिये जाने का विरोध करते हुए कहा कि कानूनन अदालत उम्रकैदी को कठोर कारावास की सजा नहीं दे सकती क्योंकि कानून में ऐसा प्रावधान नहीं है।

कानून में सिर्फ उम्रकैद कहा गया है उसमें कठोर शब्द नहीं जुड़ा है इसका मतलब है कि उम्रकैदी कठोर कारावास नहीं बल्कि साधारण कारावास काटेगा। कटारा ने कहा कि अभियुक्त को कठोर उम्रकैद की सजा दिये जाने का सत्र अदालत और उस सजा को सही ठहराने का छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का आदेश गैरकानूनी है।

उन्होंने मामले की मेरिट पर भी बहस की लेकिन कोर्ट ने मामले की मेरिट पर दी गई दलीलें खारिज कर दीं। हालांकि कोर्ट उम्रकैद की सजा में कठोर कारावास शब्द जोड़ा जा सकता है कि नहीं इस कानूनी प्रश्न पर विचार करेगा। और सिर्फ इसी मुद्दे पर कोर्ट ने सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

छत्तीसगढ़ दुर्ग की सत्र अदालत ने 2010 के हत्या के एक मामले में अभियुक्त याचिकाकर्ता राम कुमार सिवारे व एक अन्य अभियुक्त को हत्या के जुर्म में उम्रकैद और 5000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। जुर्माना अदा न करने पर छह महीने और कठोर कारावास भुगतने का आदेश दिया था। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 9 फरवरी 2016 को सत्र अदालत के फैसले पर अपनी मुहर लगा दी थी। सिवारे ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीमकोर्ट में चुनौती दी है।

Source:jagran.com

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