निजी कंपनियों में कन्नड़ लोगों को मिलेगा आरक्षण
कर्नाटक सरकार ने राज्य की कन्नड़ भाषी आबादी के लिए निजी कंपनियों में 100 फीसदी आरक्षण देने की तैयारी कर ली है. यह आरक्षण निजी कंपनियों की ग्रुप सी और ग्रुप डी (ब्लू कॉलर) नौकरियों में लागू होगा. इसके तहत उन सभी कंपनियों को आरक्षण देना होगा जिन्होंने राज्य सरकार से कारोबार शुरू करने के लिए किसी भी तरह की छूट प्राप्त की है.
क्या है राज्य सरकार की तैयारी?
राज्य के लेबर विभाग ने इंडस्ट्रियल रोजगार कानून 1961 में इस आरक्षण को देने के लिए जरूरी संशोधन का ड्राफ्ट तैयार कर लिया है. इस ड्राफ्ट के मुताबिक राज्य की कन्नड़ भाषी आबादी को राज्य की सभी प्राइवेट कंपनियों में 100 फीसदी आरक्षण दिया जाएगा. हालांकि ड्राफ्ट कानून के मुताबिक इंफोटेक और बायोटेक सेक्टर की निजी कंपनियों को इस कानून के दायरे से बाहर रखा जाएगा.
किन-किन को मिलेगा इस आरक्षण का लाभ
राज्य सरकार के मुताबिक क्षेत्रीय डोमिसाइल वाले वो सभी लोग जो पिछले 15 साल से राज्य के निवासी हैं और जिन्हें कन्नड़ भाषा पढ़ना, बोलना और लिखना आता हो वे इस आरक्षण की पात्रता रखते हैं.
निजी कंपनियों के लिए शर्त
राज्य सरकार के प्रस्तावित संशोधन में राज्य में स्थित निजी कंपनियों के लिए कड़े प्रावधान किए गए हैं. यदि कोई कंपनी कन्नड़ भाषी लोगों के लिए शत-प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान नहीं करती है तो उसे राज्य में कारोबार करने के लिए मिली सभी छूट समाप्त हो जाएंगी. सरकार के प्रस्तावित कानून के मुताबिक प्राइवेट कंपनियों को अपने ग्रुप सी और ग्रुप डी की नौकरियों के लिए पहली प्राथमिकता राज्य के लोगों को देनी होगी. वहीं थोड़ी राहत देते हुए यह भी कहा गया है कि यदि कोई कंपनी ग्रुप ए और ग्रुप बी(व्हाइट कॉलर) नौकरी में कन्नड़ भाषी लोगों को रखती है तो उसके लिए चारों ग्रुप को मिलाकर 70 फीसदी नौकरी कन्नड़ भाषी लोगों को देने का प्रावधान है.
Source:aajtak.in
No comments:
Post a Comment