जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। दुनिया की 43 फीसदी आबादी का प्रतिनिधित्व करने वाले ब्रिक्स गठबंधन के पांच देशों के बीच स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए कई कदमों पर सहमति बनी है। इसमें टीबी, एचआइवी और मलेरिया जैसी बीमारियों से निपटने के लिए साझा कार्यक्रम बनाने के साथ ही शोध और अनुसंधान में करीबी सहयोग का ढांचा तैयार करना भी शामिल है।
भारत, ब्राजील, रूस, चीन और दक्षिण अफ्रीका के स्वास्थ्य मंत्रियों की यहां चली दो दिन की बैठक की समाप्ति पर शुक्रवार को साझा घोषणापत्र जारी किया गया। इसमें तय किया गया है कि स्वास्थ्य क्षेत्र में नई दवा, टीके और तकनीक विकसित करने के लिए सभी देश मिल कर काम करेंगे। इससे जुड़ी तमाम सूचनाएं एक-दूसरे से साझा करेंगे। साथ ही स्वास्थ्य क्षेत्र के नियामक तंत्र को मजबूत बनाने के लिए अपने अनुभव बांटेंगे। इन काम के लिए जल्दी ही अलग-अलग कार्यसमूह गठित किए जाएंगे। इस दौरान इन्होंने यह भी पाया कि टीबी और एचआइवी जैसे संक्रामक रोग और मलेरिया जैसे मच्छर से पैदा होने वाले रोग का ब्रिक्स के सभी सदस्य देशों में बराबर खतरा है।
इन देशों का कहना है कि ये ऐसी बीमारियां हैं जिन पर शोध भी इन्हीं को करना होगा। इनके लिए गुणवत्तापूर्ण दवा, टीके और जांच आदि को विकसित करने के लिए इन देशों को आपसी सहयोग बढ़ाना होगा। इस दौरान 'ब्रिक्स टीबी सहयोग योजना' को अपनाने पर भी सहमति बनी। इसके तहत 'ब्रिक्स नेटवर्क ऑन टीबी रिसर्च' शुरू किया जाना है। साथ ही टीबी, एचआइवी और मलेरिया पर शोध और विकास के लिए एक कंसोर्टियम तैयार करने को ले कर भी सहमति बनी है। यह बीमारियों के लिए यह कंसोर्टियम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर धन जुटाने की कोशिश भी करेगा। इस सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने किया।
Source:jagran.com
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