अहमदाबाद
'वाघा बॉर्डर' जैसे टूरिस्ट हब की एक नई तस्वीर अब गुजरात में देखने को मिल सकती है। पंजाब स्थित लोकप्रिय पर्यटक स्थल 'वाघा बॉर्डर' की तर्ज पर गुजरात में भारत-पाकिस्तान सीमा पर भव्य गेट बनाकर इसे टूरिस्ट स्पॉट की शक्ल दी जाएगी।
यह स्पॉट गुजरात के सुइगम गांव के करीब बनसकंठा जिले में बनाया जाएगा। सीएम विजय रूपानी ने देश-दुनिया में मशहूर कच्छ रण उत्सव के उद्घाटन समारोह में यह घोषणा की। रूपानी ने ऐलान में कहा, हम यहां पर्यटकों के लिए हर वह सुविधा मुहैया करवाएंगे, जो वाघा बॉर्डर पर उपलब्ध रहती हैं।
गिरि वाइल्ड लाइफ सेंचुरी में सीएम ने पांच लॉयन सफारी पार्कों के निर्माण का भी ऐलान किया। कहा गया कि इनमें से एक पार्क अमरेली जिले के अंबार्दी में जल्द ही खुल जाएगा।
रूपानी ने भुंगाओं (कच्छ की पारंपरिक झोंपड़ियां) का भी उद्घाटन किया। इन भुंगाओं को खास तौर पर पर्यटकों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। सीएम ने 'रण ऑफ कच्छ' जाकर टेंट सिटी का भ्रमण किया व ऊंट की सवारी का आनंद लिया।
क्या है कच्छ का रण उत्सव?
इस उत्सव का आयोजन कच्छ के रेगिस्तान में किया जाता है। बताते हैं कि नमक की बहुलता वाले इस क्षेत्र में रात का रेगिस्तान 'सफेद रेगिस्तान' में बदल जाता है। सैलानियों के लिए थिअटर जैसी सुविधाओं का इंतजाम भी यहां किया जाता है। चांद की रोशनी में ऊंट की सवारी, एक से बढ़कर एक सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन इस उत्सव की खासियत है।
यहां से पाकिस्तान के सिंध क्षेत्र का नजारा भी देखने को मिलता है, जो कच्छ से थोड़ी दूर पर ही स्थित है। जानकार बताते हैं कि यह क्षेत्र स्वामी विवेकानंद के कारण भी काफी मशहूर है। कहा जाता है कि साल 1893 में 'शिकागो सम्मेलन' के लिए रवाना होने से पहले विवेकानंद ने कच्छ की यात्रा की थी। हजारों की संख्या में हर दिन विदेशी सैलानी इस उत्सव का आनंद उठाने यहां पहुंचते हैं।
Source:indiatimes.com
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