संयुक्त राष्ट्र, प्रेट्र । भारत रविवार को ऐतिहासिक पेरिस जलवायु समझौते में शामिल हो गया। उसने करार के अनुमोदन संबंधी दस्तावेज संयुक्त राष्ट्र में जमा करा दिए। अमेरिका, फ्रांस सहित पूरी दुनिया ने भारत के इस कदम की सराहना की है। नई दिल्ली के इस कदम से बढ़ते वैश्विक तापमान को काबू में करने के लिए वर्ष के अंत तक समझौता प्रभावी होने के प्रबल आसार बन गए हैं। पर्यावरण को बचाने के लिए यह विश्व की पहली बड़ी संधि है। वैश्विक संस्था में भारत के स्थायी प्रतिनिधि सैयद अकबरूद्दीन ने इस बारे में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी द्वारा हस्ताक्षरित अनुमोदन पत्र संयुक्त राष्ट्र संधि विभाग के प्रमुख सैनटियागो विलालपैंडो को सौंपा। उन्होंने समझौते की पुष्टि संबंधी भारत के कागजात गांधी जयंती के अवसर पर संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में आयोजित अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस समारोह के शुरू में ही पेश किए। एक दिन पहले ही राष्ट्रपति मुखर्जी ने पेरिस समझौते पर सरकार के प्रस्ताव को अपनी मंजूरी प्रदान की थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 सितंबर को घोषणा की थी कि गांधी जयंती के दिन दो अक्टूबर को भारत पेरिस जलवायु समझौते की पुष्टि कर देगा। 'संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने भारत के इस कदम की सराहना की है। उनका कहना था, 'पेरिस समझौते को इस वर्ष के अंत तक प्रभावी करने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है। गांधी को याद करने का इससे और कोई बेहतर तरीका नहीं हो सकता है।' पर्यावरण मंत्री अनिल माधव दवे ने कहा, 'रविवार को भारतीय समयानुसार रात 7.50 बजे हमने पुष्टि पत्र संयुक्त राष्ट्र को दे दिया। गांधी जयंती पर पेरिस समझौते का अनुमोदन कर भारत ने जलवायु परिवर्तन के दुष्परिणामों से निपटने की वैश्विक कोशिशों को भारी बल प्रदान किया है।' अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत के लोगों को बधाई दी है।ओबामा ने ट्वीट किया, "गांधी जी ऐसी दुनिया चाहते थे जो हमारे बच्चों के रहने के लायक हो। पेरिस समझौते में शामिल होकर नरेंद्र मोदी और भारत के लोगों ने उसी विरासत को आगे बढ़ाया है।" मिसाल बना भारत- अमेरिका (30 फीसद) और चीन (दस प्रतिशत) के बाद भारत केवल 4.1 प्रतिशत के साथ ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन करने वाला विश्व का तीसरा बड़ा देश है। अब तक भारत सहित 62 देशों ने जलवायु परिवर्तन समझौते की पुष्टि कर दी है। लेकिन ये सभी देश कुल मिलाकर 52 प्रतिशत ही कार्बन उत्सर्जन करते हैं। जबकि प्रावधान के अनुसार, समझौता प्रभावी होने के लिए ग्रीनहाउस गैसों का 55 प्रतिशत उत्सर्जन करने वाले कम से कम 55 देशों का अनुमोदन जरूरी है। इस लिहाज से अभी तीन फीसद उत्सर्जन करने वाले देशों से पुष्टि होनी बाकी रह गई है। पेरिस समझौते के तहत 2020 से ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कटौती का काम शुरू हो जाएगा। ताकि वैश्विक तापमान में औसत बढ़ोतरी की दर को 2 डिग्री सेल्सियस के नीचे रखते हुए 1.5 डिग्री तक लाने का लक्ष्य हासिल किया जा सके। यह है समझौता यह समझौता 12 दिसंबर, 2015 को फ्रांस की राजधानी पेरिस में हुआ था। उस समय इसे 195 देशों ने मंजूरी दी थी। इस वर्ष 22 अप्रैल को संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में भारत सहित 191 देशों ने समझौते पर दस्तखत किए। अब पेरिस समझौते को प्रभावी करने के लिए अनुमोदन का काम चल रहा है। 62 देशों ने इसकी पुष्टि कर दी है। ग्रीनहाउस गैसों का 55 प्रतिशत उत्सर्जन करने वाले देशों से अनुमोदन मिलते ही यह प्रभावी हो जाएगा। लेकिन इस पर कार्रवाई 2020 से शुरू होगी।
Courtesy :jagran. Com
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