Tuesday, 25 October 2016

दुनिया में खतरनाक स्तर तक पहुंच गई है कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा

ओस्लो, रायटर । वातावरण में कार्बन डाइऑक्साइड (सीओ-2) की मात्रा खतरनाक स्तर तक पहुंच चुकी है। विश्व मौसम संगठन (डब्लूएमओ) के अनुसार 2015 में इस खतरनाक ग्रीनहाउस गैस की मात्रा पहली बार 400 पा‌र्ट्स पर-मिलियन (पीपीएम) की खतरनाक स्तर तक तक पहुंच गई। औद्योगिक क्रांति से पहले की तुलना में यह 44 फीसद ज्यादा है। संयुक्त राष्ट्र के अधीन आने वाले डब्लूएमओ का कहना है कि सीओ-2 के उत्सर्जन में कटौती शुरू करने के बावजूद इसके दुष्प्रभावों को कम करने में पीढि़यां गुजर जाएगी। पेरिस और किगाली समझौते के बाद मौजूदा शताब्दी के दूसरे हिस्से में अक्षय ऊर्जा का इस्तेमाल बढ़ने और जीवाश्म ईधन के प्रयोग में कमी आने की उम्मीद जताई गई है। डब्लूएमओ के महासचिव पेट्री टैलेस ने कहा, वर्ष 2015 में पेरिस जलवायु परिवर्तन समझौते पर सहमति बनने से नए ऐतिहासिक युग की शुरुआत हुई है। यह साल ग्रीनहाउस गैसों की मात्रा को लेकर भी ऐतिहासिक रहा। अब समझौते के प्रावधानों को अमल में लाने के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखानी पड़ेगी। दुर्भाग्य से व्यवहार में ऐसा कोई बदलाव नहीं दिखा है। हवाई के मौना लोआ स्थित ऑब्जर्वेटरी के मुताबिक 2016 में भी वातावरण में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा 400 पीपीएम तक रहेगी। वर्ष 2060 से ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी आने का अनुमान है। डब्लूएमओ के पर्यावरण शोध विभाग की प्रमुख ओक्साना तारासोवा ने बताया कि जीवाश्म ईधन के इस्तेमाल में कमी नहीं आने पर सीओ-2 की मात्रा में वृद्धि जारी रहेगी। उनके मुताबिक तकनीक उपलब्ध है, बस इच्छाशक्ति की जरूरत है। अगर हम चाहें तो यह किया जा सकता है। उन्होंने अम्ल वर्षा से बचने के लिए यूरोपीय देशों की दृढ़ता का उदाहरण दिया। इससे बचने के लिए सल्फर और नाइट्रोजन के उत्सर्जन को नियंत्रित किया गया।

Courtesy:jagran.com

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