नई दिल्ली
खूंखार आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट और बोको हराम के बाद माओवादी दुनिया में सबसे खतरनाक हैं। माओवाद से बुरी तरह प्रभावित छत्तीसगढ़ की सरकार ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में यह बात कही। राज्य सरकार ने कहा कि निकट भविष्य में नक्सलियों से बात नहीं की जा सकती है क्योंकि सरकार और माओवादियों के बीच भरोसे की कमी है। सूबे की सरकार ने यह जवाब सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश के एक सप्ताह बाद दिया है, जिसमें शीर्ष अदालत ने केंद्र और राज्य सरकारों को नक्सल समस्या से निपटने का प्लान पेश करने का आदेश दिया है।
एडिशनल सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जस्टिस मदन बी. लोकुर और जस्टिस आदर्श कुमार गोयल की पीठ को बताया कि इस मामले का समाधान इसलिए नहीं हो पा रहा है क्योंकि कुछ ऐक्टिविस्ट इस मामले को लगातार गरम रखना चाहते हैं। बीते शुक्रवार को शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार से सशस्त्र माओवादियों से बातचीत की राह तलाशने के लिए कहा था। कोर्ट ने कोलंबियाई राष्ट्रपति जुआन मैनुअल सैंटोस द्वारा सशस्त्र गुरिल्लाओं से बातचीत के प्रयास का उदाहरण देते हुए यह कहा था।
कोलंबियाई राष्ट्रपति ने बातचीत के जरिए करीब 50 साल से चल रही हिंसा को रोकने में कामयाबी हासिल की है। मेहता ने अदालत को बताया कि आतंकवाद से प्रभावित जम्मू-कश्मीर से अधिक सुरक्षाबलों की तैनाती छत्तीसगढ़ में की गई है। उन्होंने कहा, 'इस्लामिक स्टेट और बोको हराम के बाद माओवादी दुनिया में तीसरे सबसे खूंखार संगठन हैं।' अदालत ने ऐक्टिविस्ट मनीष कुंजम की याचिका पर सुनवाई करते हुए
Courtesy:ndtv.com
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