लंदन, प्रेट्र । भारत में बच्चियों के लिए उपलब्ध सुविधाओं में 'नाटकीय' सुधार हुआ है। संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में भारत को ऐसे देश के रूप में प्रदर्शित किया गया है जो दुनिया के अन्य देशों में उनकी युवा आबादी के हालात बेहतर बनाने के लिए उदाहरण बन सकता है। संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (यूएनएफपीए) की इस रिपोर्ट 'द स्टेट ऑफ वर्ल्ड पॉपुलेशन 2016' में यह भी कहा गया है कि 10 साल या उससे अधिक की लड़कियों को नुकसान पहुंचाने या उनके मानवाधिकारों का उल्लंघन करने वाली प्रथाएं उन्हें व्यस्क होने पर उनकी पूर्ण क्षमताओं का आभास नहीं होने देतीं। लिहाजा, दुनियाभर में इस दिशा में और काम किए जाने की जरूरत है। 'इंटरनेशनल सेंटर फॉर रिसर्च ऑन वूमेन' के हवाले से इसमें कहा गया है कि किशोर गर्भावस्था, सेकेंडरी स्कूल छोड़ने की उच्च दर और युवा महिलाओं में बेरोजगारी की वजह से भारत को हर साल करीब 56 अरब डॉलर की संभावित कमाई का नुकसान होता है। रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया में दस साल की हर तीन बच्चियों में से एक भारत और चीन में रहती है। भारत में दस साल उम्र की 1.2 करोड़ से ज्यादा लड़कियां हैं, जो अन्य किसी देश के मुकाबले कहीं ज्यादा हैं। माध्यमिक स्कूलों में प्रगति के आंकड़ों के आधार पर रिपोर्ट कहती है कि इनमें से करीब नौ लाख (1.2 करोड़ की नौ प्रतिशत) लड़कियों को प्राथमिक शिक्षा उपलब्ध हैं, लेकिन वे शायद ही अपनी माध्यमिक शिक्षा जारी रख पाएं। अनुमानों के मुताबिक, अगर दस साल उम्र की सभी लड़कियां अपनी माध्यमिक शिक्षा पूरी कर लें तो विकासशील देशों के लिए हर साल 21 अरब डॉलर का लाभांश पाने का रास्ता खुल सकता है। यूएनएफपीए ने चेतावनी दी है कि जबरन शादी, बाल श्रम, महिला जननांगों में विकृति और अन्य प्रथाएं न सिर्फ लड़कियों के स्वास्थ्य और अधिकारों में कमी करती हैं बल्कि यह दुनिया के विकास एजेंडे के लिए भी खतरा हैं।
Courtesy:jagran.com
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