नई दिल्ली, (जागरण ब्यूरो)। भारतीय बैंकिंग तंत्र में अब तक का सबसे बड़ा डेबिट कार्ड डेटा लीक होने का मामला सामने आने के बाद रिजर्व बैंक ने सोमवार को कहा कि फोरेंसिक ऑडीटर ने इस मामले की जांच शुरु कर दी है। आरबीआइ ने यह भी स्पष्ट किया कि दुरुपयोग किए गए कार्डो की संख्या कम है। आरबीआइ ने इस मामले पर चुनिंदा बैंकों के अधिकारियों, नेशनल पेमेंट कारपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआइ) और कार्ड नेटवर्क ऑपरेटरों के साथ बैठक कर कुछ कार्डो का डेटा कथित तौर पर लीक होने संबंधी घटनाक्रम के विपरीत प्रभाव को नियंत्रित करने के उपायों पर चर्चा की। आरबीआइ ने कहा कि उसे आठ सितंबर को ज्ञात हुआ कि कुछ बैंकों के कार्ड की सूचनाएं लीक हो गयी है। संभव है कि ये सूचनाएं एटीएम पर लीक हुई हों। आरबीआइ ने एक बयान जारी कर कहा कि फिलहाल एक अधिकृत फोरेंसिक ऑडीटर पीसीआइ-डीएसएस फ्रेमवर्क (पेमेंट कार्ड इंडस्ट्री डाटा सीक्युरिटी स्टेंडर्ड) के तहत इसकी जांच कर रहा है। आरबीआइ ने साफ किया कि दुरुपयोग किए गए कार्ड्स की संख्या बहुत कम है। आरबीआइ ने कहा कि संबंधित कार्ड नेटवर्क ऑपरेटर्स से इस अवधि के दौरान इस्तेमाल हुए कार्ड की विस्तृत जानकारी भी मांगी गयी थी। उल्लेखनीय है कि सार्वजनिक क्षेत्र के कई बैंकों ने 32 लाख डेबिट कार्ड को या तो वापस मंगा लिया है या फिर ब्लॉक कर दिया है ताकि वित्तीय फ्रॉड को रोका जा सके। वहीं वित्त मंत्रालय ने इस मामले में आरबीआइ तथा विभिन्न एजेंसियों से 10 दिनों के भीतर रिपोर्ट मांगी है। आपके खाते से गायब हुआ पैसा तो तुरंत करें ये उपाय, वर्ना-कहीं देर ना हो जाए...
Courtesy:jagran.com
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