Sunday, 11 September 2016

सस्ती आयातित गैस पर बढ़ेगी निर्भरता

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। केंद्र सरकार अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल (क्रूड) समेत तमाम पेट्रोलियम उत्पादों की गिरती कीमतों का लाभ उठाना चाहती है। सरकार की कोशिश है कि गिरती कीमतों का फायदा उठाते हुए घरेलू गैस की खपत को कम रख आयातित गैस पर निर्भरता बढ़ाई जाए। इससे आने वाले वर्षो में जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में दाम बढ़ेंगे तो गैस के घरेलू भंडार का उपयोग किया जा सकेगा। तेल व प्राकृतिक गैस मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक जिस हिसाब से देश में गैस की मांग बढ़ रही है, उसी अनुपात में आपूर्ति बढ़ाना आवश्यक है। फिलहाल देश में होने वाली खपत में 60 फीसद हिस्सा घरेलू उत्पादन से आता है, जबकि 40 फीसद की आयात से पूर्ति होती है। लेकिन आने वाले वर्षो में यह अनुपात पलट जाने की संभावना है। इसके लिए सरकार आवश्यक बुनियादी ढांचा तैयार कर रही है। इसके अगले पांच-छह वर्षो में पूरा हो जाने की उम्मीद है। क्रूड व पेट्रोलियम क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि अभी लंबे समय तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में इन उत्पादों के दाम नीचे ही बने रह सकते हैं। ऐसे में सस्ते पेट्रोलियम उत्पादों का लाभ उठाने का यही वक्त है। इसके दो लाभ होंगे। पहला, महंगी विदेशी मुद्रा बचेगी। दूसरा, घरेलू भंडार को भी संरक्षित रखा जा सकेगा। घरेलू बाजार में गैस की मांग मूलत: रिफाइनरी, उर्वरक कारखानों और बिजली संयंत्रों की तरफ से आती है। जब तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस के दाम ऊंचे रहे तो घरेलू बाजार में मांग भी कम रही। अब सस्ती आयातित गैस का विकल्प उपलब्ध होने से खपत भी बढ़ रही है। इस साल अप्रैल में गैस की खपत 14 फीसद की दर से बढ़ी है। जबकि 2015-16 में बढ़त की दर मात्र दो फीसद थी। इस अवधि में देश में 52 अरब घनमीटर गैस की खपत हुई। इसका 40 फीसद हिस्सा आयात से पूरा किया गया। आयातित गैस को विदेश से एलएनजी के रूप में लाया जाता है। आयातित एलएनजी की बढ़ती मांग को देखते हुए सरकार इसके आधारभूत ढांचे का विस्तार कर रही है। देश में एलएनजी टर्मिनलों की क्षमता को 2020 तक 4.75 करोड़ टन सालाना हो जाएगी। इसकी मौजूदा क्षमता 2.13 टन सालाना की है। फिलहाल देश में चार एलएनजी टर्मिनल हैं। गुजरात में दाहेज और हजीरा, महाराष्ट्र में दाभोल और केरल में कोच्चि में आयातित गैस पहुंचती है। इस साल के अंत तक दाहेज की क्षमता मौजूदा एक करोड़ टन से बढ़कर 1.5 करोड़ टन हो जाएगी। इसे आगे 2.5 करोड़ टन तक ले जाने की योजना है। मौजूदा टर्मिनलों के अतिरिक्त तमिलनाडु के एन्नोर में 50 लाख टन वार्षिक क्षमता वाला नया टर्मिनल लगाने की योजना है। साथ ही राज्य के धामरा और काकीनाडा में भी 50-50 लाख टन क्षमता के दो टर्मिनल विकसित करने की योजना पर काम चल रहा है। टर्मिनल के साथ-साथ सरकार गैस बॉटलिंग प्लांटों की क्षमता विस्तार करने की दिशा में भी काम कर रही है। कुछ प्लांटों पर दो की जगह तीन शिफ्ट में काम शुरू किया गया है। इससे सरकार की गरीबों तक सस्ती गैस पहुंचाने का लक्ष्य पूरा करने में भी मदद मिलेगी। भारत को परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह का सदस्य बनाने में जुटा रहेगा अमेरिका विशेष दर्जे की मांग को लेकर बंद से आंध्र में जनजीवन ठप

Courtesy: jagran. Com

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