सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा है कि मोबाइल फोन कान पर लगाकर वाहन चलाने वालों के लिए सख्त सजा का प्रावधान किया जाए। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में मिलने वाली छह माह से लेकर दो वर्ष तक की सजा पर्याप्त नहीं है, न ही ऐसे लोगों पर इसका भय पैदा करने वाला असर है।
मोबाइल फोन पर बात करते हुए वाहन चलाने वाले कृत्य को खतरनाक तरीके से वाहन चलाने की श्रेणी में रखा जाता है, जिसके लिए छह माह से लेकर दो वर्ष की सजा या एक हजार रुपये/दो हजार रुपये जुर्माने का प्रावधान है।
जस्टिस दीपक मिश्रा और जस्टिस सी. नागप्पन की पीठ ने यह आदेश बुधवार को उस वक्त दिया जब अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने कहा कि खतरनाक तरीके से वाहन चलाने की धारा-184 में किया गया दो वर्ष की सजा का प्रावधान बेहद कम है। वहीं, पहली बार ऐसा कृत्य करने वाले के लिए सिर्फ छह माह की सजा या एक हजार रुपये के जुर्माने का ही प्रावधान है। उन्होंने कहा कि मोबाइल फोन कान पर लगाकर वाहन चलाने वाले न सिर्फ स्वयं को परेशानी में डालते हैं बल्कि, दूसरों के लिए भी मुसीबत पैदा करते हैं। ऐसे लोगों को धारा-184 के तहत निरुद्ध किया जाता है, लेकिन इसका उचित असर नहीं है। लोग वाहन चलाते हुए लगातार इसका प्रयोग कर रहे हैं। देश में रोजाना ऐसी हजारों दुर्घटनाएं हो रही हैं। ऐसे लोगों के साथ बेहद सख्ती से पेश आने की जरूरत है।
कोर्ट ने अटॉर्नी जरनल से कहा कि वह उचित प्राधिकार को इस बारे में अवगत कराएं, जिससे वे सजा बढ़ाने पर विचार करें। सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जरनल ने कहा कि धारा 304 ए में लापरवाही से गाड़ी चलाकर जान लेने तथा लापरवाही के कारण मरने के सभी मामले शामिल हैं और इसके लिए सजा बढ़ाने से कोई उद्देश्य हल नहीं होगा।
पिछली सुनवाई पर कोर्ट ने इस मामले में अटॉर्नी जनरल को बुलाया था। कोर्ट ने कहा कि लापरवाह चालकों पर सख्ती करने की जरूरत है, क्योंकि वाहन दुर्घटना में सजा कम होने से दुर्घटनाएं बढ़ी हैं और लोगों को ऐसे लापरवाह चालकों के कारण अपनी जान से हाथ धोना पड़ रहा है। मामले की अगली सुनवाई दिसंबर में होगी।
Courtesy :live hindustan. Com
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