Saturday, 17 September 2016

सजायफ्ता नेताओं पर HC से केंद्र को नोटिस

दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब

सजायफ्ता नेताओं के चुनाव लड़ने पर जीवन भर प्रतिबंध की मांग वाली याचिका पर हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है. हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए 4 हफ्ते का समय दिया है.

नेताओं की योग्यता तय हो
याचिका मे कहा गया है कि रिप्रजेंटेशन ऑफ पीपुल्स एक्ट (जनप्रतिनिधि कानून) के सेक्शन 8 के तहत कोई भी राजनीतिक पार्टी बनाने और चुनाव लड़ने के लिए नेताओं के लिए कोई योग्यता ही तय नहीं की गई है. जबकि एक सफाई कर्मचारी पर भी अगर कोई केस चलता है और उसे कोर्ट से सजा मिलती है तो उसे नौकरी से निकाल दिया जाता है. आईपीसी की धाराओं मे अगर किसी को सजा होती है तो उसे पद से हटा दिया जाता है, लेकिन ये नियम नेताओं पर अभी तक लागू नहीं होता है.

नेता हो या अधिकारी सबके लिए कानून बराबर
याचिका लगाने वाले वकील अश्वनी उपाध्याय ने एक अहम सवाल उठाया गया है कि सजायाफ्ता व्यक्ति तो सजायाफ्ता है. वह चाहे नेता तो या अधिकारी या कर्मचारी. कानून किसी मे फर्क नहीं करता और कानून सबके लिए बराबर है तो फिर सजा पा चुके नेता को चुनाव लड़ने का अधिकार कैसे दिया जा सकता है. याचिका में कहा गया है कि किसी भी लोक सेवक को एक सप्ताह के लिए भी सजा हो जाती है तो उनको आजीवन नौकरी से निकाल दिया जाता है तो नेताओं को भी सजा होने पर जीवन भर के लिए चुनाव लड़ने पर रोक लगनी चाहिए.

6 साल के लिए रोक का प्रावधान
फिलहाल किसी भी नेता को सजा होने पर महज 6 साल के लिए चुनाव लड़ने पर रोक लगाने का प्रावधान है. जनप्रतिनिधि कानून की धारा 9 और 8 को इस याचिका मे चुनौती दी है. क्योंकि अभी कानून में ये प्रावधान ही नहीं है कि चुनाव लड़ने की कम से कम और ज्यादा से ज्यादा शैक्षिक योग्यता क्या होनी चाहिए.

याचिका में कहा गया है कि देश में चपरासी बनने के लिए भी न्यूनतम योग्यता तय है जबकि उनको सिर्फ कोई लिखा-पढ़ी का कार्य नहीं करना है तो फिर सांसद और विधायक बनने के लिए योग्यता कियों नहीं जबकि उन्हें कानून बनाना होता है. ऐसे में जनप्रतिनिधि कानून की के धारा 8 को रद्द किये जाने की जरुरत है. इस धारा के तहत ही कोई शैक्षणिक योग्यता न होने पर भी नेताओं के चुनाव लड़ सकने का प्रावधान है.हाइकोर्ट ने इस याचिका पर अगली सुनवाई के लिए 4 दिसंबर की तारीख तय की है.

Courtesy: aajtak. In

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