नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी मूडीज ने एक बार फिर भारत में रिफार्म्स की चाल को धीमा बताया है। उसने कहा कि प्राइवेट इन्वेस्टमेंस कम है और बैंकों के फंसे कर्जों (एनपीए) की चुनौती बरकरार है। ऐसे में भारत की रेटिंग में अगले एक-दो साल में तभी सुधार हो सकता है, जब यह सुनिश्चित हो जायेगा कि रिफॉर्म्स पर अमल हुआ है।
फिस्कल कंसॉलिडेशन पर तेजी से हो रहा काम
मूडीज ने भारत को बीएए3 रेटिंग दे रखी है और आगे का परिदृश्य सकारात्मक रखा गया है। उसका कहना है कि आने वाले समय में यदि यह लगता है कि उसके पॉलिसी मेकर्स फिस्कल कंसॉलिडेशन के लिए तेजी से काम कर रहे हैं। जीडीपी के समक्ष कर्ज के अनुपात को कम करने और इन्फ्रास्ट्रक्चर की कमियों को दूर करने व मानूसन में आने वाले उतार चढ़ाव की चुनौती से निपटने में सक्षम हो रहे हैं। ऐसे संकेत यदि मिलते हैं तो निश्चित ही रेटिंग में सुधार होगा।
1-2 साल तक रखेंगे नजरः मूडीज
मूडीज की सावरेन ग्रुप की सीनियर वीपी मैरी डिरोन ने रिपोर्टर्स से कहा, ‘भारत के बारे में हमारा परिदृश्य सकारात्मक है। संतुलन में यदि देखा जाए तो जोखिम ज्यादा है। हम लगातार रेटिंग पर नजर रखे हुए हैं। हम अगले एक-दो साल इस पर नजर रखेंगे और वास्तविक धरातल में होने वाला कोई भी बदलाव रेटिंग में बदलाव ला सकता है।’
मूडीज ने गिनाए 6 रिफॉर्म्स
मूडीज ने सुधारों के मामले में 6 रिफॉर्म्स गिनाए हैं, जिनमें कदम बढ़ने से वह रेटिंग बेहतर करने पर विचार कर सकता है। इनमें भूमि अधिग्रहण विधेयक, श्रम कानूनों में रिफॉर्म, ढांचागत क्षेत्र में उल्लेखनीय निवेश, मेक इन इंडिया पहल के तहत वास्तविक लाभ, कर प्रशासन और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में रिफॉर्म प्रमुख क्षेत्र हैं।
मूडीज ने कहा है कि निजी क्षेत्र में धीमा निवेश, सरकारी बैंकों की कमजोर हालात से संभावित जोखिम लगातार बना हुआ है और भारत की रेटिंग में यह बाधा बने हुए हैं। डिरोन ने कहा कि इसके साथ ही बाहरी क्षेत्र की संवेदनशीलता और भू-राजनीतिक जोखिम का अतिरिक्त दबाव भी भारत पर बना हुआ है।
Courtesy :moneybhaskar.com
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