Wednesday, 28 September 2016

रिलायंस जियो और आरकॉम का वर्चुअल मर्जर हो चुका हैः अनिल अंबानी

 नई दिल्ली अंबानी भाइयों में बंटवारे के एक दशक बाद रिलायंस कम्युनिकेशंस के चेयरमैन अनिल अंबानी ने ऐलान किया कि उनकी टेलिकॉम कंपनी का तो उनके बड़े भाई मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस जियो इंफोकॉम के साथ 'एक तरह से विलय हो चुका है।' अनिल ने मंगलवार को आरकॉम की सालाना जनरल मीटिंग में शेयरधारकों से कहा, 'चाहे हमारे 10 करोड़ कस्टमर्स की बात हो, हमारे 10 लाख रिटेलर्स की बात हो, हमारे कर्मचारियों, वेंडर्स और फिर चाहे हमारे पार्टनर्स की बात हो, इन दोनों संगठनों (आरकॉम और जियो) का पहले ही वर्चुअल मर्जर हो चुका है।' अनिल ने कहा, 'हमारा स्पेक्ट्रम साझा है। नेटवर्क साझा है। फाइबर, टावर और वॉइस भी साझा हैं।' अनिल एक शेयरहोल्डर के इस सवाल का जवाब दे रहे थे कि दोनों कंपनियां आपसी सहयोग के तमाम ऐग्रिमेंट्स के बावजूद एक-दूसरे के साथ आधिकारिक तौर पर विलय क्यों नहीं कर रही हैं। आरकॉम और जियो ने स्पेक्ट्रम की ट्रेडिंग और शेयरिंग का समझौता किया है।

इसके अलावा दोनों के बीच टावर और फाइबर शेयरिंग के ऐग्रिमेंट्स भी हैं। दोनों टेलीकॉम कंपनियों ने अपने नेटवर्क ऑपरेटिंग सेंटर्स, ऑप्टिकल फाइबर सर्विस कॉन्ट्रैक्ट्स और नेटवर्क मेंटेनेंस फंक्शंस को भी आपस में मिला लिया है।

इसी महीने जियो ने अपनी सर्विसेज शुरू की थीं और अब दोनों कंपनियों के 'वर्चुअल मर्जर' का ऐलान हुआ है। अविभाजित रिलायंस इंडस्ट्रीज ने 2002 में टेलिकॉम सेक्टर में पहला कदम रखा था। मुकेश और उनके करीबी मित्र मनोज मोदी ने टेलिकॉम वेंचर के लॉन्च की कमान संभाली थी। हालांकि धीरूभाई अंबानी के निधन के बाद पारिवारिक बंटवारे में टेलीकॉम बिजनेस के साथ पावर और फाइनैंशल सर्विसेज बिजनेस अनिल को मिले, जबकि ऑयल और पेट्रोकेमिकल्स बिजनेस बड़े भाई के पास रहे। दोनों भाइयों ने एक-दूसरे से होड़ न करने का समझौता किया था। इसे 2010 में म्यूचुअल ऐग्रिमेंट के जरिए खारिज कर दिया गया था।

उसके बाद मुकेश ने एक कंपनी को खरीद कर टेलिकॉम सेक्टर में दोबारा कदम रखा था। उस कंपनी ने नीलामी में अखिल भारतीय स्तर पर 4जी एयरवेव्स हासिल की थीं। खरीदी गई उस कंपनी का नाम बाद में रिलायंस जियो इन्फोकॉम रखा गया।

Courtesy :India times.com

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