Tuesday, 20 September 2016

कावेरी जल विवाद : कर्नाटक को नहीं मिली राहत

बेंगलूरु.नई दिल्ली. कावेरी जल बंटवारा विवाद में कर्नाटक को सोमवार को एक और झटका लगा। कर्नाटक को कावेरी निगरानी समिति से भी राहत नहीं मिल पाई। अब कर्नाटक की उम्मीदें मंगलवार को सर्वोच्च न्यायालय में होने वाली सुनवाई पर टिकी है।

10 दिन तक 3 हजार क्यूसेक
केंद्रीय जल संसाधन सचिव शशि शेखर की अध्यक्षता वाली समिति ने कर्नाटक को 21 से 30 सितम्बर तक रोजाना 3 हजार क्यूसेक पानी देने का आदेश दिया। इससे पहले कई घंटे तक चली बैठक में कर्नाटक और तमिलनाडु में पानी के बंटवारे को पानी के बंटवारे को लेकर सहमति नहीं बन पाई। कर्नाटक के मुख्य सचिव अरविंद जाधव ने राज्य के जलाशयों में पानी की उपलब्धता नहीं होने के कारण तमिलनाडु को पानी देने में असमर्थता जताई जबकि तमिलनाडु के मुख्य सचिव ने और पानी दिए जाने की मांग की। समिति के अध्यक्ष के नाते शशि शेखर ने कर्नाटक को तीन हजार क्यूसेक पानी 10 दिन तक तमिलनाडु को देने के आदेश दिए। बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में शशि शेखर ने कहा कि दोनों राज्यों में सहमति बन पा रही थी लिहाजा हमने दोनों राज्यों की ओर से उपलब्ध कराए गई जानकारी के आधार पर आदेश दे दिए। उन्होंने कहा कि दोनों राज्य आदेश को मानने या उसे शीर्ष अदालत में चुनौती देने के लिए स्वतंत्र हैं। असंतुष्ट होने की स्थिति में वे मंगलवार को सर्वोच्च न्यायालय में मामले की सुनवाई के दौरान इसे चुनौती दे सकते हैं या अदालत के सामने सहमति जता सकते हैं। 
गौरतलब है कि समिति की बैठक अदालत के आदेश पर हुई थी। पांच सितम्बर को तमिलनाडु को डेढ़ लाख क्यूसेक पानी देने के आदेश के साथ ही शीर्ष अदालत ने समिति को इसके बाद छोडऩे जाने वाली पानी की मात्रा तय करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद 12 सितम्बर को समिति की बैठक हुई थी लेकिन वह बेनतीजा रही थी। समिति ने दोनों राज्यों से पिछले 29 सालों में कावेरी पानी की हिस्सेदारी, उसके उपयोग, बारिश में अंतर और उसके प्रभाव को लेकर 15 सितम्बर तक आंकड़े मांगे थे।

शशि शेखर ने कहा कि समिति ने कर्नाटक और तमिलनाडु के अलावा केरल और केंद्र शासित प्रदेश पुदुचेरी की ओर से रखे गए तथ्यों पर भी गौर किया। समिति की कोशिश वैज्ञानिक आधार पर सर्वमान्य हल तलाशने की थी लेकिन कर्नाटक और तमिलनाडु में जारी किए जाने वाली मात्रा को लेकर सहमति नहीं बन पाई। समिति की यह सातवीं बैठक थी।
सनद रहे कि पांच सितम्बर को तमिलनाडु की याचिका पर शीर्ष अदालत ने कर्नाटक को 10 दिन तक 15 हजार क्यूसेक पानी देने के निर्देश दिए थे। इसके बाद 6द सितम्बर को कर्नाटक ने सर्वदलीय बैठक हुई जिसमें अदालत के फैसले का सम्मान करने की बात सरकार ने कही। सात सितम्बर से पानी छोडऩा शुरू किया। लेकिन इसी बीच कर्नाटक सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष याचिका दायर कर राहत की गुहार लगाई। 12 सितम्बर को अवकाश होने के बावजूद सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक सरकार की याचिका पर सुनवाई की लेकिन कर्नाटक को राहत नहीं मिली। कर्नाटक सरकार की ओर कानून-व्यवस्था और विरोध-प्रदर्शनों का हवाला दिए जाने पर अदालत ने नाराजगी जताई। अदालत ने कर्नाटक को 20 सितम्बर तक तमिलनाडु को पानी देने के लिए कहा। हालांकि, अदालत ने पानी की मात्रा 15 हजार क्यूसेक से घटाकर 12 हजार क्यूसेक कर दी लेकिन दिन बढ़ा दिए,जिसके कारण राज्य को राहत नहीं मिली। 12 सितम्बर को कोर्ट के आदेश और तमिलनाडु में कन्नड़ भाषियों को निशाना बनाए जाने से नाराज लोगों ने बेंगलूरु और प्रदेश के अन्य हिस्सों में प्रदर्शन किया लेकिन कुछ घंटे में प्रदर्शन ने हिंसक रूप ले लिया। 100 से ज्यादा वाहन भीड़ ने फूंक दिए। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को बेंगलूरु के 16 थाना क्षेत्रों में 36 घंटे से अधिक तक कफ्र्यू लगाना पड़ा था। हालांकि, एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत ने आदेश के खिलाफ प्रदर्शन को लेकर दोनों राज्यों की खिंचाई की थी और रिपोर्ट तलब की थी। 

Courtesy: patrika. Com

No comments:

Post a Comment