नई दिल्ली। कमोडिटी डेरीवेटिव्स मार्केट में मजबूती के साथ साथ लिक्विडिटी बढ़ाने के लिए सेबी ने ऑप्शंस ट्रेडिंग को मंजूरी दे दी है। एक्सचेंज, पार्टिसपेन्ट और इनवेस्टर काफी समय से ऑप्शंस को मंजूरी देने की मांग कर रहे थे। अब तक कमोडिटी डेरीवेटिव मार्केट में सिर्फ फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट को मंजूरी मिली हुई है। मार्केट एक्सपर्ट ने सेबी के इस फैसले का स्वागत किया है और इसे पूरे मार्केट के लिए पॉजिटिव बताया है ।
मार्केट में लिक्विडिटी और पार्टिसिपेशन बढ़ेगा- सेबी
सेबी के मुताबिक इस फैसले से कमोडिटी डेरिवेटिव मार्केट की ग्रोथ में मदद मिलेगी। इसके साथ ही लिक्विडिटी बढ़ाने और कमोडिटी मार्केट में हेजिंग को आसान बनाने में मदद मिलेगी। सेबी के मुताबिक इस फैसले से पार्टिसिपेशन बढ़ाने में भी मदद होगी। इस बार के आम बजट में वित्त मंत्री ने ऐलान किया था कि कमोडिटी डेरिवेटिव में नए डेरिवेटिव प्रोडक्ट लाए जाएंगे।नियमों के मुताबिक कमोडिटी एक्सचेंज को ऑप्शंस शुरू करने के लिए सेबी से मंजूरी लेनी होगी। इससे जुड़ी गाइडलाइन जल्द जारी होंगी। सेबी ने डेरिवेटिव प्रोडक्ट पर फैसले के लिए कमोडिटी डेरिवेटिव्स एडवाइजरी कमेटी का गठन किया था। सेबी के मुताबिक कमेटी की मिली सलाह के बाद कमोडिटी डेरिवेटिव एक्सचेंज को ऑप्शंस की मंजूरी दी गई है। सेबी ने एफएमसी के मर्जर के साथ कमोडिटी डेरिवेटिव मार्केट का रेग्युलेशन पिछले साल 28 सितंबर से अपने हाथ में लिया था। मर्जर की शर्त के अनुसार एफएमसी द्वारा बनाए गए नियम एक साल तक जारी रहे थे। ये सीमा अब खत्म हो गई है। जिसके बाद नियमों में बदलाव किया जा सकता है।
मार्केट को मिलेगा फायदा- एक्सपर्ट
एमसीएक्स के सीईओ मृगांक परांजपे ने कहा कि ऑप्शंस की शुरुआत से कमोडिटी डेरिवेटिव्ज मार्केट्स प्रोडक्ट्स और पार्टिसपेन्ट के लिए और ज्यादा बेहतर होंगे। वहीं इससे मार्केट में सुधार देखने को मिलेगा। फैसले से मौजूदा वायदा कॉन्ट्रैक्ट को भी मजबूती मिलेगी और घरेलू कमोडिटी डेरिवेटिव मार्केट में ग्रोथ देखने को मिलेगी। ऑप्शंस की शुरुआत से किसानों और दूसरे पार्टिसपेन्ट को काफी फायदा होगा।
केडिया कमोडिटी के अजय केडिया के मुताबिक कमोडिटी मार्केट में ऑप्शंस की शुरुआत होने से मार्केट में निवेशकों का पार्टिसिपेशन काफी बढ़ सकता है। वहीं, इस प्रोडक्ट से निवेशकों के लिए जोखिम कम हो जाएगा। कम जोखिम की वजह से कमोडिटी मार्केट में वॉल्यूम कई गुना तक बढ़ सकते हैं। फ्यूचर और ऑप्शंस में मुख्य अंतर कॉन्ट्रैक्ट पूरा करने की बाध्यता को लेकर होता है। ऑप्शंस में खरीददार के पास खरीद का अधिकार होता है। हालांकि इसमें बाध्यता यानी आब्लिगेशन नहीं होती। कमोडिटी ऑप्शंस से किसानों और प्रोसेस करने वाली कंपनियों को कीमतों से जुड़े जोखिम कम करने में मदद मिलेगी।
Courtesy :moneybhaskar.com
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