नई दिल्ली : संप्रग शासन के दौरान ब्राजील के विमान निर्माता एंबरियर के साथ हुए 20.8 करोड़ डॉलर के जेट सौदे को लेकर विवाद उत्पन्न हो गया है क्योंकि अमेरिकी अधिकारियों ने कथित रिश्वत भुगतान की जांच शुरू कर दी है जबकि भारत ने कंपनी से 15 दिन के भीतर सूचना मांगी है।
यह खबरें सामने आने के बाद कि 2008 का सौदा अमेरिकी न्याय विभाग की जांच के घेरे में आ गया है जो ठेके हासिल करने के वास्ते कथित रिश्वत भुगतान को लेकर एंबरियर की जांच कर रहा था। रक्षा मंत्रालय ने आज कहा कि रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा सूचना हासिल करने के बाद आगे के कदम उठाये जा सकते हैं।
रक्षा मंत्रालय सूत्रों ने कहा, ‘डीआरडीओ ने एंबरियर विमान निर्माता से 2008 में हस्ताक्षर हुए विमान सौदे पर आयी मीडिया की खबरों पर 15 दिन के भीतर सूचना मांगी है।’ उन्होंने कहा, ‘डीआरडीओ की ओर से सूचना मिलने के बाद आगे के कदम उठाये जाएंगे।’ वर्ष 2008 में एईडब्ल्यू ऐंड सी (एयरबॉर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम्स) के लिए स्वदेशी राडार से लैस तीन विमानों के लिए एंबरियर और डीआरडीओ के बीच सौदे पर हस्ताक्षर हुए थे।
भाजपा ने इस मुद्दे पर कांग्रेस पर हमला बोला।
केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि वे सोचते थे कि 2014 में सत्ता परिवर्तन के बाद कांग्रेस के भ्रष्टाचार की कहानी कम सुनी जाएगी। लेकिन प्रत्येक सौदा दाग का संकेत दे रहा है। उन्होंने भाजपा कार्यालय में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘संप्रग का अतीत चौंकाने वाली अनियतितताओं के साथ सामने आता रहता है।’ अमेरिका का न्याय विभाग साल 2010 से इस कंपनी की जांच कर रहा है जब डोमिनिकन गणराज्य के साथ ठेके ने अमेरिका के संदेह को बढ़ा दिया था।
उसके बाद से जांच का दायरा बढ़ा दिया गया ताकि आठ और देशों के साथ व्यावसायिक लेने-देने की जांच की जा सके।
ब्राजील के अखबार फोल्हा डी साओ पाउलो के मुताबिक, ‘अमेरिकी सरकार ने जांच शुरू की है ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या एंबरियर ने विदेशों से ठेके हासिल करने के लिए रिश्वत दी थी जिसके कारण कंपनी ने सऊदी अरब और भारत के साथ जो समझौते किए हैं, वह प्रभावित हुए हैं।’ संदेह है कि ब्रिटेन स्थित एक प्रमुख भारतीय बिचौलिए ने इस समझौते में अहम भूमिका निभायी।
पूर्व में एईडब्ल्यूएंडएस कार्यक्रम को संभाल चुके डीआरडीओ प्रमुख एस. क्रिस्टोफर ने न तो फोन उठाया और न ही भेजे गए संदेश पर कोई प्रतिक्रिया दी।
समाचारपत्र ने कहा कि एंबरियर जांचकर्ताओं के साथ सहयोग कर रही है और कंपनी ने जुलाई माह में घोषणा की थी कि उसे उम्मीद है कि जल्द ही अमेरिकी अधिकारियों के साथ कोई समझौता हो जाएगा।
कंपनी ने 20 करोड़ डॉलर अलग रखे हैं ताकि प्रक्रिया के परिणाम के तहत कोई जुर्माना होने पर उसका भुगतान किया जा सके।
समाचारपत्र के मुताबिक जांच की स्थिति के बारे में कंपनी की ओर से कोई भी जानकारी जारी नहीं की गई है लेकिन इस मामले को देख रहे तीन लोगों ने समाचारपत्र फोल्हा से पुष्टि की है कि सउदी अरब तथा भारत में हुए सौदों की जांच हो रही है।
दोनों ही मामलों में संदेह इस साल मई में तब हुआ जब बीते 30 साल से कंपनी में काम कर रहे एक कर्मचारी ने ब्राजील के संघीय जांच कार्यालय द्वारा की जा रही जांच में सूचना मुहैया कराने के बदले सजा कम करने पर सौदेबाजी कर ली थी।
एंबरियर में रक्षा क्षेत्र में मैनेजर एल्बर्ट फिलिप क्लोज ने जांचकर्ता मारसेलो मिलर को बताया कि उन्होंने यूरोप में काम करने वाले एक पूर्व बिक्री निदेशक को अमेरिकी जांचकर्ताओं के समक्ष यह स्वीकार करते सुना था कि सउदी अरब को विमानों की बिक्री में सुविधा के लिए घूस दी गई।
नवम्बर 2010 में कंपनी ने सऊदी अरब की सरकारी तेल कंपनी अरामको को दो एंबरियर 170 एक्जेक्यूटिव जेट की आपूर्ति की घोषणा की थी। उस समय सौदे की राशि की घोषणा नहीं की गई थी।
Courtesy: hike. In
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