जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने लड़कियों की 18 वर्ष से कम आयु में शादी और विधवा होने पर उन्हें बेसहारा छोड़ दिए जाने पर चिंता जताई है। शुक्रवार को विधवाओं की हालत पर राष्ट्रीय महिला आयोग की रिपोर्ट देखने के बाद कोर्ट ने यह चिंता जाहिर की। उसने इस ओर ध्यान देने की जरूरत पर बल दिया। रिपोर्ट पेश करने के साथ ही आयोग ने देश भर में विधवाओं की स्थिति पर सर्वे और अध्यन पूरा करने के लिए कोर्ट से कुछ और समय दिए जाने की मांग की। शीर्ष न्यायालय ने अनुरोध स्वीकार करते हुए आयोग को विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने के लिए 11 नवंबर तक का समय दे दिया। इससे पहले कोर्ट ने महिला आयोग की ओर से पेश रिपोर्ट देखी। इसमें देश के विभिन्न हिस्सों में विधवाओं की दयनीय दशा का ब्योरा दिया गया है। पढ़ें- मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का SC को जवाब- सुधार के नाम पर नहीं बदल सकते कानून आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में ज्यादातर लड़कियों की 18 वर्ष से कम उम्र में ही शादी कर दी जाती है। उप्र में विधवा आश्रम में रह रही महिलाएं ज्यादातर पिछड़ी जातियों से हैं, जबकि पश्चिम बंगाल में सामान्य वर्ग की हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि इन महिलाओं को सरकारी पेंशन नहीं मिलती। परिवार की संपत्ति में भी कोई अधिकार नहीं मिलता। कोर्ट ने रिपोर्ट देख कर कहा कि कैसे किसी नाबालिग लड़की की शादी की जा सकती है। विधवा होने पर उसे निराश्रित छोड़ दिया जाता है। ये तो चौंकाने वाले हालात हैं। अदालत ने सरकार से कहा कि वह इस ओर ध्यान दे। आयोग को पूरे देश के बारे में समग्र रिपोर्ट दाखिल करने के लिए समय देते हुए कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से कहा कि वह इसमें आयोग को सहयोग और आंकड़े दे। शीर्ष न्यायालय ने आयोग से कहा कि वह विधवाओं के अलावा निराश्रित महिलाओं के बारे में भी अपनी रिपोर्ट दे। सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका लंबित है। इसमें वृंदावन (उप्र) की विधवाओं की दयनीय दशा का मुद्दा उठाया गया है। पढ़ें- दिल्ली के बिग बॉस पर फिर छिड़ी जंग, SC पहुंची केजरीवाल सरकार
Courtesy: jagran. Com
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