भारतीय कारोबारी को जासूस साबित करने, ISI ने तैयार किया नकली वीजा-पासपोर्ट?– IBN Khabar
नई दिल्ली। जिस भारतीय नागरिक को पाकिस्तान ने जासूस बताया है वो मुंबई का रहने वाला है। जानकारी के मुताबिक नेवी से रिटायरमेंट लेने के बाद उसने ईरान में अपना कारोबार शुरू किया था। अब पाकिस्तान उस पर ये आरोप लगा रहा है कि वो आतंकी हमले करने के लिए पाकिस्तान आया था। पाकिस्तान अपने इस झूठ पर ज्यादा दिन टिक नहीं पाएगा। क्योंकि आशंका ये भी है कि जो वीजा और पासपोर्ट पाकिस्तान ने दिखाया है वो भी फर्जी है, मेड इन पाकिस्तान है।
क्या पाकिस्तान में पकड़े गए भारतीय कारोबारी का पासपोर्ट नकली है, क्या उसके पास से मिला ईरानी वीजा भी नकली है और क्या भारतीय कारोबारी को जासूस साबित करने के लिए ISI ने नकली वीजा-पासपोर्ट तैयार किया? ये सवाल इसलिए अहम है, क्योंकि जासूस इस तरह वीजा-पासपोर्ट के साथ नहीं पकड़े जाते। अगर भारत को बलूचिस्तान में जासूस भेजना ही होता तो फिर उसे कोई भी पहचान दी जा सकती थी, सिवाय भारतीयता के। इसलिए ये आशंका गहरा गई है कि ईरान से अपहरण करके बलूचिस्तान लाने के बाद आईएसआई ने बाकायदा इस भारतीय कारोबारी का भारतीय पासपोर्ट तैयार करवाया। नकली पासपोर्ट बनाने में आईएसआई कितनी माहिर है। ये पूरी दुनिया जानती है। जाहिर है पाकिस्तानी कुछ भी करके बलूचिस्तान में चल रहे आजादी के आंदोलन से भारत को जोड़ना चाहता है।
जिस भारतीय नागरिक को पाकिस्तान ने जासूस बताया है वो मुंबई का रहने वाला है। जानकारी के मुताबिक नेवी से रिटायरमेंट लेने के बाद उसने ईरान में अपना कारोबार शुरू किया था।
दरअसल, बलूचिस्तान पाकिस्तान में शामिल होते हुए भी उसका हिस्सा नहीं है। बलूचिस्तान के लोग पाकिस्तान से छुटकारा चाहते हैं। बलूचिस्तान के लोग पाक से ज्यादा भारत के साथ हैं और इसी की कीमत उन्हें चुकानी पड़ती है। बलूचिस्तान के लोग पाकिस्तान से अलग होने के लिए, अपनी आजादी हासिल करने के लिए आंदोलन कर रहे हैं ।
आपको बता दें बलूचिस्तान पाकिस्तान के पश्चिम का राज्य है जिसकी राजधानी क्वेटा है। बलूचिस्तान के पड़ोस में ईरान और अफगानिस्तान है। 1944 में ही बलूचिस्तान को आजादी देने के लिए माहौल बन रहा था। लेकिन 1947 में इसे जबरन पाकिस्तान में शामिल कर लिया गया। तभी से बलूच लोगों का संघर्ष चल रहा है और उतनी ही ताकत से पाकिस्तानी सेना और सरकार बलूच लोगों को कुचलती रही है। ये अलग बात है कि दुनिया को दिखाने के लिए पाकिस्तानी सेना के मुखिया जनरल राहिल शरीफ बलूचिस्तान की रट लगाते रहते हैं।
जाहिर है, पाकिस्तान को सिर्फ झूठ बोलना आता है। सच्चाई ये है कि आजादी की लड़ाई के दौरान भी बलूचिस्तान के स्थानीय नेता अपना अलग देश चाहते थे। लेकिन जब पाकिस्तान ने फौज और हथियार के दम पर बलूचिस्तान पर कब्जा कर लिया तो वहां विद्रोह भड़क उठा था। वहां की सड़कों पर अब भी ये आंदोलन जिंदा, पूरी ताकत के साथ जिंदा है। कुछ दिन पहले आईबीएन7 ने ही आपको बलूचिस्तान की युवा आंदोलनकारी करीमा बलूच से मिलवाया था। बलूचिस्तान से अपनी जान बचाकर कनाडा पहुंची करीमा बलूच ने खुलासा किया था कि कैसे पाकिस्तान बलूचिस्तान के लोगों को बर्बाद करने पर तुला हुआ है।
करीमा ने कहा था कि बलूचिस्तान में पाकिस्तान जनसंहार कर रहा है। बलूचिस्तान में लोग अचानक गायब हो जाते हैं। लोगों को मारकर फेंक दिया जाता है। बलूचिस्तान के बारे में बोलना मेरा अधिकार, पाक हमें बोलने का अधिकार नहीं देता। बलूचिस्तान में अखबारों को आजादी नहीं। छात्र संगठनों पर बैन लगा हुआ है। बलूचिस्तान में खुद को बलूच कहना मुश्किल, बलूचिस्तान के लोगों की आवाज उठाना जरूरी है।
दरअसल, बलूचिस्तान के लोगों ने कभी खुद को पाकिस्तान का हिस्सा माना ही नहीं। वो कभी पाकिस्तान के साथ नहीं जाना चाहते थे। वहीं पाकिस्तानी फौज और सरकार हमेशा से इनकार करती रही है कि बलूचिस्तान में वो नागरिक आंदोलन को कुचल रही है। पाकिस्तान हमेशा झूठा आरोप लगाता है कि बलूचिस्तान आंदोलन के पीछे भारत का हाथ है और इसी झूठ को सच साबित करने के लिए उसने ये पूरा जासूसी ड्रामा खड़ा किया है।
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