Thursday, 17 March 2016

काशी में धर्म धरोहरें बनी चोरों का 'साफ्ट टार्गेट'

काशी में धर्म धरोहरें बनी चोरों का 'साफ्ट टार्गेट'

लखनऊ। वाराणसी में गंगा-आदिगंगा के संगम पर स्थित कैथी मार्कंडेय महादेव मंदिर से प्रभु श्रीराम की दुर्लभ प्रतिमा चोरी हो गई। काशी की बेशकीमती धर्म धरोहरों पर चोरों की नजर गड़ चुकी है। पुलिसिंग को गहरे सवालों के दायरे में खड़ा करने वाली चोरी की इस घटना ने लोगों को आक्रोश से भर दिया है। दरअसल देश की सांस्कृतिक और धर्म राजधानी काशी में इन दिनों दुर्लभ वस्तुएं चोरों के निशाने पर आ चुकी हैं। मंगलवार रात किसी समय मार्कंडेय महादेव धाम में हुई चोरी से तकरीबन ढाई साल पहले मूलगादी कबीर मठ से संत कबीर की माला चोरी हो गई, उसका पता आज तक नहीं चला। वर्ष 2011 में तुलसी घाट से रामचरित मानस की दुर्लभ पांडुलिपि चुराई गई थी। इसके विरोध में बड़ा आंदोलन हुआ था जिसका नतीजा बरामदगी के रूप में सामने आया। बावजूद इसके जंगमबाड़ी मठ से चोरी गए पारद शिवलिंग समेत कई दुर्लभ समान का पता अब तक नहीं चल सका है। मंदिरों से चोरी का सिलसिला लगभग तीन दशक पहले शुरू हुआ था जब श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर के शिखर पर लगा सोना चोरी हुआ था। इस वारदात को शासन ने गंभीरता से लिया जिसका नतीजा था कि चोर पकड़े गए और सोना भी बरामद हुआ। इसके बाद शासन ने मंदिर का अधिग्रहण कर लिया। बावजूद इसके वहां से चोरियों की घटना प्रकाश में आती रहती है। पिछले साल संदिग्ध हालात में त्रिशूल चोरी हो गया था और बवाल होने पर बरामद भी हो गया। दुर्लभ मूर्तियों व वस्तुओं की चोरी छोटे मंदिरों से लेकर बड़े मठों तक से हो रही है। देश के नहीं, विदेशी नागरिक तक पकड़े गए हैं लेकिन बरामदगी अभी तक नहीं हो सकी है।

दो वर्ष से अधिक पुराना है मंदिर कैथी स्थित मारकडेय महादेव धाम का उद्भव गंगा अवतरण से पूर्व का माना जाता है। मान्यता है कि एक ऋषि ने पुत्र न होने पर तप किया। उन्हें ब्रह्म जी के आशीर्वाद से पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई लेकिन 12 वर्ष की अल्प आयु के लिए। समय नजदीक आते देख माता-पिता व पुत्र मारकंडेय ने गोमती तट पर शिवलिंग बनाकर पूजन शुरू किया। समय पूरा होने पर यमराज आए तो मारकडेय शिवलिंग से लिपट गए। प्रगटे भगवान शिव ने यमराज को खाली हाथ लौटाया और मरकडेय को अभयदान दिया। इसके अलावा महादेव ने अपने नाम से पहले उनके नाम को जोड़कर मरकडेय को अमर कर दिया। कहा जाता है कि मंदिर का वर्तमान स्वरूप 200 वर्ष से अधिक पुराना है।

No comments:

Post a Comment