Tuesday, 15 March 2016

बिहार में एक बार फिर आरक्षण पर सियासी घमासान

बिहार में एक बार फिर आरक्षण पर सियासी घमासान

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सर कार्यवाह सुरेश भैयाजी जोशी के आरक्षण की समीक्षा के बयान पर एक बार फिर बिहार में सियासत गरमा गई है। जदयू और राजद समेत एनडीए के पार्टनर रालोसपा और हम ने भी इस पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने भी इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है।

वहीं भाजपा ने आरक्षण की समीक्षा को जरूरी बताया है। याद रहे कि बिहार विधानसभा चुनाव से पहले आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने ऐसे ही बयान दिए थे, जो बड़ा चुनावी मुद्दा बना था।

देश तोड़ने वाला बयान : जदयू
जदयू के राष्ट्रीय महासचिव और पूर्व मंत्री श्याम रजक ने कहा है कि भैयाजी जोशी का बयान देश के संविधान का अपमान है। डॉ. भीमराव अंबेडकर ने जो आरक्षण की व्यवस्था लागू कराई, उससे छेड़छाड़ करने की बात बार-बार आरएसएस द्वारा की जाती है। इसे कहीं से भी उचित नहीं कहा जा सकता है। इस तरह के बयान से देश टूटेगा। डॉ. अंबेडकर ने भविष्य में आरक्षण से छेड़छाड़ की आशंका जताई थी, जो अब सच साबित होती दिख रही है।
आरएसएस मनुवादी व्यवस्था का पोषक: राजद
राजद के प्रदेश अध्यक्ष रामचंद्र पूर्वे ने कहा कि आरसएएस और भाजपा मनुवादी व्यवस्था केपोषक हैं। ये कभी नहीं चाहते कि गरीब और कमजोर तबका समाज की मुख्य धारा में आए। इसलिए वे इस आरक्षण व्यवस्था को खत्म करना चाहते हैं। राजद हर मोर्चे पर इन विचारधाराओं का विरोध करता रहेगा।

आरक्षण की समीक्षा की बात बर्दाश्त नहीं : रालोसपा
रालोसपा विधायक ललन पासवान ने आरएएएस नेता के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि आरक्षण की समीक्षा की बात कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। संविधान में अंबेडकर ने जो अधिकार कमजोर वर्ग को दिलाया है, उसे छेड़ने की कोशिश ठीक नहीं।

आरएसएस पहले अपने संगठन की व्यवस्था सुधारे: हम

हम के राष्ट्रीय प्रवक्ता और पूर्व सांसद ब्रह्मदेव पासवान आनंद ने कहा है कि आरएसएस पहले अपने अंदर असंवैधानिक आरक्षण पर विचार करे, जहां आजतक महत्वपूर्ण पदों पर दलित, आदिवासी, पिछड़े और महिलाओं को मौका नहीं दिया गया। आरएसएस को आरक्षण पर बोलने का कोई अधिकार नहीं है।

नीतीश-लालू लोगों को गुमराह कर रहे : भाजपा
संविधान में जिनके लिए आरक्षण की व्यवस्था की गई है, उन तक इसका लाभ नहीं पहुंच रहा है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है। आखिर कैसे गरीबों-दलितों और अति पिछड़ों तक आरक्षण का लाभ मिले, इसकी समीक्षा होनी चाहिए। इसलिए भैयाजी के बयान का हम स्वागत करते हैं। बिहार में कई जातियों को अति पिछड़ा व अनुसूचित जाति में शामिल किया गया, पर आरक्षण का दयारा नहीं बढ़ाया गया। इसलिए समीक्षा होनी चाहिए।
- प्रेम कुमार, नेता प्रतिपक्ष विधानसभा

क्या कहा था सुरेश जोशी भैयाजी
बाबा साहेब भीमराव अंबेदकर ने आरक्षण के जो प्रावधान किए, वह सामाजिक न्याय के लिए थे। आज जो लोग आरक्षण की मांग कर रहे हैं उन्हें इस अवधारणा का ख्याल रखना चाहिए। संपन्न तबकों द्वारा आरक्षण की मांग गलत है। समृद्ध वर्ग के लोगों को अपने अधिकार छोड़ने चाहिए। पिछड़े वर्ग के जरूरतमंद लोगों को आरक्षण का लाभ मिल रहा है या नहीं, इसकी समीक्षा होनी चाहिए।

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