ऑड ईवन स्कीम का दूसरा फेज 15 अप्रैल से होगा लागू
दिल्ली में ऑड ईवन नंबर व्यवस्था 15 अप्रैल से लागू होगी। 15 दिन तक इस व्यवस्था के दौरान नंबर के हिसाब से ही गाडि़यां चलाने की अनुमति होगी।
इस दौरान कार छोड़ने वाले लोगों को परेशानियां नहीं उठानी पड़े। इसके लिए अतिरिक्त बसें मार्गो पर उतारी जाएंगी। इसके लिए दिल्ली सरकार बसों के लिए स्पेशल परमिट जारी करेगी। ये परमिट 15 दिन के लिए होंगे। परिवहन मंत्री गोपाल राय ने सोमवार को यह जानकारी दी। इस चरण में केवल कांट्रेक्ट कैरिज बसों को ही पर्यावरण बस सेवा में प्रयोग किया जाएगा और स्कूल बसें इसके दायरे से बाहर रखी जाएंगी।
31 अप्रैल तक चलने वाले इस व्यवस्था को लागू करने में कोई तकनीकी अड़चन नहीं आए। बसों के लिए 28 मार्च से 14 अप्रैल तक पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। सरकार ने यह भी फैसला लिया है कि ऑड ईवन व्यवस्था को सख्ती से लागू करने के लिए दिल्ली सरकार इस बार एक हजार अधिक वालिंटियर तैनात करेंगे। इससे पूर्व हुए पहले चरण में 4 हजार वांटियर लगाए गए थे और इस बार 5 हजार वांटियर लगाने का फैसला लिया गया है। सम विष व्यवस्था का यह दूसरा चरण होगा। बस में भी वांलिटियर उपलब्ध रहेंगे।
8 अप्रैल तक तय होगा आखिरी प्रारूप
ऑड ईवन व्यवस्था के दौरान में किस प्रकार से कार्यप्रणाली को रखा जाएगा। इसका आखिरी प्लान 8 अप्रैल तक तैयार हो जाएगा। इसमें सरकार यह स्पष्ट कर देगी कि किन लोगों को इस दायरे में रखा जा रहा है और कौन इसके दायरे से बाहर रहेंगे। हालांकि इसके शुरुआत प्रारूप में यह तय किया जा चुका है कि यह चरण भी करीब-2 पूर्व चरण की तरह ही होगा। महिलाएं व दुपहिये इसके दायरे से बाहर ही रहेंगे।
1 अप्रैल तक होगी 400 पूर्व कर्मचारियों की भर्ती
अगली बैठक में दिल्ली मेट्रो व यातायात पुलिस इसका पूरा प्लान देंगे। दिल्ली सरकार ने यह भी फैसला लिया है कि 1 अप्रैल तक 400 पूर्व कर्मचारियों की भी भर्ती की जाएगी। ये कर्मचारी सेना से सेवानिवृत्त होंगे। इनका प्रयोग मार्ग संचालन व अन्य कार्यो के लिए किया जाएगा। इसके अतिरिक्त प्रदूषण की निगरानी दिल्ली समेत आसपास के राज्यों के स्तर पर भी की जाएगी। जिसे मोबाइल वैन की मदद से जांच जाएगा।
सर्वे से लिया है फिर लागू करने का फैसला
ऑड ईवन नंबर व्यवस्था को लागू किया जा सके। इसके लिए दिल्ली सरकार ने सर्वेक्षण कराए थे। इस सर्वेक्षण के दौरान में विधायकों की उपस्थित में लोगों से राय ली गई थी। सरकार के मुताबिक इसके लिए 4 लाख सैम्पल लिए गए थे, जिसमें 80 प्रतिशत लोगों ने इस व्यवस्था को लागू करने के पक्ष में फैसला लिया था
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