Wednesday, 8 February 2017

SC ने कलकत्ता हाईकोर्ट के जज के न्यायिक कामों पर लगाई रोक, 13 फरवरी को पेश होने के निर्देश

पहली बार SC ने हाईकोर्ट के जज के खिलाफ अवमानना के मामले की सुनवाई की

इतिहास में पहली बार एक जज के खिलाफ SC की मामले की सुनवाईकलकत्ता हाईकोर्ट के जज के न्यायिक कामों पर लगाई रोकजस्टिस करनन ने PM को लिखी चिट्ठी में जजों पर लगाए भ्रष्टाचार के आरोप

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में पहली बार सात जजों की बेंच ने हाईकोर्ट के वर्तमान जज सीएस करनन के खिलाफ अदालत की अवमानना के मामले की सुनवाई की. कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए करनन को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए 13 फरवरी को कोर्ट में पेश होने के निर्देश दिए. साथ में शीर्ष अदालत ने कोलकाता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को आदेश दिया है  कि वे करनन को कोई न्यायिक और प्रशासनिक कार्य ना सौंपे. साथ में जस्टिस करनन को कोलकाता हाईकोर्ट की सारी फाइलें और दस्तावेज वापस करने के आदेश भी दिए गए हैं.  इस मामले में कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया है.  

बुधवार को न्याय के मामले में एक ऐतिहासिक दिन था. आज सुप्रीम कोर्ट को मुख्य न्यायाधीश एवं  छह अन्य वरिष्ठ न्यायाधीश जस्टिस दीपक मिश्रा, जे. चेलामेश्वर, रंजन गोगोई, मदन बी. लोकुर, पीसी घोष और कुरियन जोसफ की बनी बेंच ने कोलकाता के एक जज के खिलाफ अवमानना के मामले की सुनवाई की.

खास बात ये है कि मामले में नोटिस जारी करने का आदेश जारी करते हुए सात जजों की बेंच ने पहले माननीय जस्टिस सीएस करनन लिखवाया, लेकिन फिर इसे कटवा कर श्री जस्टिस सीएस करनन लिखवाया.

मामले की सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने कहा कि वक्त आ गया है कि अब सुप्रीम कोर्ट इस मामले में वर्तमान जज के खिलाफ कारवाई कर एक उदाहरण पेश करें. इस तरह जजों पर भ्रष्टाचार के आरोप की चिट्ठी लिखना सीधे-सीधे न्यायिक प्रक्रिया में बाधा पहुंचाना है और इस तरह जज का चिट्ठी लिखना न्यायतंत्र को शर्मसार और ध्वस्त करने की एक सोची समझी नीति है.

बता दें कि जस्टिस करनन ने कुछ दिन पहले प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिखकर कई जजों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए जांच की मांग की थी. सुप्रीम कोर्ट ने इसे अवमानना मानकर सुनवाई करने का फैसला किया.

जस्टिस करनन पहले भी विवादों में रहे हैं, जब उन्होंने मद्रास हाईकोर्ट में रहते हुए अपने ही चीफ जस्टिस के खिलाफ आदेश जारी किए थे. यहां तक कि सुप्रीम कोर्ट में सीजेआई के कोलेजियम के उन्हें मद्रास से कोलकाता हाईकोर्ट ट्रांसफर करने के फैसले पर खुद ही स्टे कर दिया था.

Source:ndtv.com

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