जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। अक्टूबर, 2018 से केवल आटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशनों के मार्फत वाहनों की जांच कराने और फिटनेस सर्टिफिकेट जारी किए जाने के केंद्र के फरमान का राज्यों ने विरोध किया है। राज्यों का कहना है कि इस समय सीमा के भीतर सभी आरटीओ में पर्याप्त टेस्टिंग स्टेशन स्थापित करना कठिन है। इसलिए इस तारीख को आगे बढ़ाया जाना चाहिए। संसदीय समिति ने भी राज्यों के रुख को सही ठहराया है। उसने केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय से कहा है कि वह राज्यों के साथ चर्चा कर उनकी सुविधानुसार टेस्टिंग स्टेशनों की स्थापना की नई तारीख तय करे।
संसदीय समिति ने मोटर वाहन (संशोधन) विधेयक, 2016 पर संसद में पेश रिपोर्ट में वाहनों की फिटनेस जांचने के लिए 1 अक्टूबर, 2018 तक सभी राज्यों में अधिकृत टेस्टिंग स्टेशन स्थापित करने के लिए धारा-56 में संशोधन करने के प्रस्ताव का उल्लेख करते हुए इस पर राज्यों की आपत्ति का ब्यौरा दिया है। समिति का कहना है कि अनेक राज्य केंद्र द्वारा प्रस्तावित इस अंतिम तारीख को स्वीकार करने की स्थिति में नहीं हैं। राज्यों का कहना है कि चूंकि उनके लिए इस तारीख तक पर्याप्त संख्या में टेस्टिंग स्टेशन स्थापित करना संभव नहीं होगा, लिहाजा इस तारीख को आगे बढ़ाया जाना चाहिए।
इस संदर्भ में समिति ने उत्तर प्रदेश का खास तौर पर उल्लेख किया है जिसने कहा है कि उसके यहां अभी तक मात्र एक ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन की स्थापना हो सकी है। समिति के अनुसार इसी तरह की कोई न कोई समस्या हर राज्य ने बताई हैं। इससे पता चलता है कि टेस्टिंग स्टेशनों की स्थापना में निश्चित रूप से समय लगेगा। लिहाजा समिति की सिफारिश है कि सड़क परिवहन मंत्रालय राज्यों के साथ परामर्श कर नई तारीख का निर्धारण करे। यहां तक कि हर राज्य के लिए अलग तारीख का निर्धारण भी किया जा सकता है। समिति के अनुसार टेस्टिंग स्टेशनों की स्थापना का विचार अच्छा है। परंतु जब तक हर राज्य के सभी आरटीओ में पर्याप्त टेस्टिंग स्टेशन स्थापित नहीं हो जाते तब तक कोई तारीख तय नहीं की जानी चाहिए।
निजी वाहनों पर लागू नहीं हो :
समिति ने विधेयक के धारा-56 के उपबंध-7 में प्रस्तावित उस संशोधन से भी असहमति जताई है जिसमें ट्रांसपोर्ट वाहनों की भांति गैर-ट्रांसपोर्ट वाहनों के लिए भी फिटनेस जांच कराने तथा फिटनेस सर्टिफिकेट लेने को अनिवार्य किए जाने का प्रावधान है। समिति का कहना है कि ट्रांसपोर्ट वाहनों का उपयोग गैर-ट्रांसपोर्ट वाहनों से अलग किस्म का होता है। इसलिए उन पर वही नियम आरोपित नहीं किए जा सकते जो ट्रांसपोर्ट वाहनों के लिए निर्धारित हैं। इससे जनता के लिए समस्याएं पैदा होंगी। इन तथ्यों के आलोक में समिति ने उपबंध-7 को हटाने का सुझाव दिया है।
Source:jagran.com
No comments:
Post a Comment