नई दिल्ली
नए साल की पूर्व संध्या पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐलान किया था कि मातृत्व लाभ योजना के तहत गर्भवती और स्तनपान कराने वाली सभी महिलाओं को 6,000 रुपये की रकम दी जाएगी। लेकिन, इंग्लिश न्यूज पोर्टल इंडियनएक्सप्रेस.कॉम में छपी खबर के मुताबिक, अपर्याप्त बजट की वजह से महिला और बाल कल्याण मंत्रालय इसे सिर्फ पहले बच्चे के जन्म तक ही सीमित करने जा रहा है। इतना ही नहीं, पहले केंद्र सरकार इस योजना के फंड में 60 प्रतिशत का योगदान करती थी, लेकिन अब वह 50 प्रतिशत राशि ही दे पाएगी। यानी, अब राज्य और केंद्र सरकारों के बीच मातृत्व लाभ योजना की फंडिंग का हिस्सा आधा-आधा बंट जाएगा। मौजूदा प्रावधानों के मुताबिक हरेक महिला को दो प्रसव पर वित्तीय सहायता दी जाती है।
महिला एवं बाल कल्याण मंत्रालय इस योजना के लिए कैबिनेट नोट तैयार कर रहा है। मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, 'प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) से बातचीत के बाद योजना को लागू करने के लिए हम कैबिनेट नोट तैयार करने की प्रक्रिया में हैं। बजट में आवंटित राशि के मद्देनजर हमें कहा गया है कि पहले बच्चे को जन्म देने वाली माओं को ही पैसे दिए जाएं।'
31 जनवरी, 2016 को अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि मैटरनिटी बेनिफिट स्कीम को देश के 650 जिलों में लागू किया जाएगा। उन्होंने कहा था कि सहायता राशि संबंधित महिला के अकाउंट में जमा हो जाएगी।
गौरतलब है कि यह स्कीम पूर्ववर्ती यूपीए सरकार ने अक्टूबर 2010 में इंदिरा गांधी मातृत्व सहयोग योजना के नाम से शुरू की थी। तब से यह देश के 53 जिलों में पायलट बेसिस पर चल रही थी। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून 2013 के तहत इसे पूरे देश में लागू करना जरूरी था। इसी के मद्देनजर प्रधानमंत्री मोदी की घोषणा के तुरंत बाद महिला एवं बाल कल्याण मंत्रालय ने जनवरी में योजना के डीटेल्स जारी कर दिए थे। इसमें कहा गया था कि केंद्र सरकार फंड में 60 प्रतिशत राशि का योगदान करेगी। इस फंड का इस्तेमाल 19 साल के ऊपर की गर्भवती महिलाओं को दिया जाएगा। तब इसकी सीमा दो बच्चों के जन्म तक तय की गयी थी।
Source:indiatimes.com
No comments:
Post a Comment