नई दिल्ली, प्रेट्र/आइएएनएस। भारत और अमेरिका के बीच लॉजिस्टिक्स समझौता होने के कुछ महीने बाद ही रिलायंस डिफेंस एंड इंजीनियरिंग लि. (आरडीईएल) ने अमेरिकी नेवी के सातवें बेड़े को रिपेयरिंग व आल्टरेशन सर्विस देने के लिए अनुबंध होने की घोषणा की है। अमेरिकी नेवी का का सातवां बेड़ा आकार में सबसे बड़ा है और यह पश्चिमी प्रशांत और हिंद महासागर में तैनात है। इस बेड़े में तकरीबन 50-70 पोत व पनडुब्बी, 140 एयरक्राफ्ट और करीब 20 हजार सैनिक तैनात हैं।
रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर के नियंत्रण वाली आरडीईएल ने एक बयान में कहा है कि उसने अमेरिकी नेवी के साथ मास्टर शिप रिपेयर एग्रीमेंट (एमएसआरए) पर हस्ताक्षर किये हैं। अनुमान है कि इस अनुबंध से आरडीईएल को करीब 15 हजार करोड़ रुपये का कारोबार मिलेगा। इससे पहले जनवरी में समूह की ही कंपनी रिलायंस शिपयार्ड को अमेरिकी नेवी की ओर से अनुमति प्राप्त कांट्रेक्टर के तौर पर योग्य माना गया था। गुजरात के पीपावाव में रिलायंस शिपयार्ड भारत में एक मात्र एमएसआरए सर्टिफाइड कांट्रेक्टर के तौर पर प्रमाणित किया गया।
Source:jagran.com
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