Saturday, 11 February 2017

हर तीन साल में सुधारने होंगे विश्वविद्यालयों को पाठ्यक्रम

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। उच्च शिक्षा के छात्रों को अब विश्वविद्यालयों के बनाए पुराने और घिसे-पिटे पाठ्यक्रमों के आधार पर ही पढ़ाई करने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ेगा। सभी विश्वविद्यालयों को निर्देश दिया गया है कि उनके यहां चल रहे सभी पाठ्यक्रमों की हर तीन साल में समीक्षा कर उन्हें प्रासंगिक बनाएं। यह फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हुई केंद्र सरकार के विभिन्न सचिवों की बैठक में लिया गया है।

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने इस संबंध में सभी विश्वविद्यालयों को निर्देश जारी कर कहा है कि वे इस मामले को शीर्ष प्राथमिकता दें और तत्काल कार्यवाही करते हुए यह सुनिश्चित करें कि विश्वविद्यालय में पढ़ाए जा रहे सभी पाठ्यक्रमों की तय समय पर समीक्षा कर उन्हें अद्यतन किया जाए।

यह निर्देश सिर्फ केंद्रीय विश्वविद्यालयों के लिए नहीं, बल्कि सभी यूनिवर्सिटी और कालेजों पर लागू होगा। यूजीसी के सचिव जसपाल एस संधु की ओर से भेजे गए इस पत्र में यह भी कहा गया है कि इस समीक्षा और सुधार के दौरान विभिन्न विभागों को दूसरे विभागों से जुड़ी जरूरतों का भी ध्यान रखा जाए। इसमें कहा गया है कि समाज के विभिन्न वर्गो की तेजी से बढ़ती जरूरतों को तभी पूरा किया जा सकता है, जब विश्वविद्यालयों की ओर से उपलब्ध करवाए जा रहे कार्यक्रमों में सुधार की पुख्ता व्यवस्था हो।

मौजूदा समय में जिस तेजी से बदलाव हो रहे हैं उसके साथ ही शिक्षा संबंधी जरूरतों में भी बदलाव आ रहे हैं। हाल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शिक्षा और रोजगार से जुड़े विभिन्न विभागों के सचिवों के साथ बैठक की थी। इसमें उन्होंने इस बात पर जोर दिया था कि कालेजों और विश्वविद्यालयों में चल रहे पाठ्यक्रमों को ऐसा बनाया जाए कि वे वक्त के साथ कदम मिला कर चल सकें। इसके बाद केंद्रीय मानव संसाधन विकास (एचआरडी) मंत्रालय ने इस संबंध में पत्र लिखा था।

भारत में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में यह समस्या लंबे समय से चली आ रही है। लेकिन कोई पुख्ता दबाव नहीं होने की वजह से अधिकांश विश्वविद्यालय इस ओर पर्याप्त ध्यान नहीं दे रहे। जबकि मौजूदा सरकार पढ़ाई को अधिक से अधिक रोजगार परक बनाना चाहती है।

Source:jagran.com

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