चुनावी वादों को न पूरा न कर पाने की स्थिति में इलाहाबाद हाईकोर्ट के लखनऊ बेंच ने आज चुनावी वादा पूरा न करने की स्थिति में पार्टियों का रजिस्ट्रेशन रद करने का भी प्रस्ताव किया है।
लखनऊ (वेब डेस्क)। किसी भी चुनाव के पहले जनता से लुभावने वादे करने के बाद उनको पूरा न करने वाले राजनीतिक दल अब हाईकोर्ट के रडार पर हैं। इस पार्टियों में सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी भी है। जिन्होंने अपने चुनावी घोषण पत्र में सरकार बनने पर मुसलमानों को 18 प्रतिशत आरक्षण देने का वादा किया था। इलाहाबाद हाईकोर्ट के लखनऊ बेंच में अब इस मामले में अगली सुनवाई पांच सितंबर को होगी।
चुनावी घोषणा पत्र के वादों को न पूरा न कर पाने की स्थिति में इलाहाबाद हाईकोर्ट के लखनऊ बेंच ने आज चुनावी वादा पूरा न करने की स्थिति में पार्टियों का रजिस्ट्रेशन रद करने का भी प्रस्ताव किया है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने आज राजनैतिक पार्टियों के चुनावी घोषणाओं को लेकर सख्त रुख अपनाया है, हाईकोर्ट ने कहा जो वादे पूरे न करें उन पार्टियों का रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया जाये।
गौरतलब है कि एक वकील अजमल खां ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर पीपल्स रिप्रजेंटेशन एक्ट में बदलाव की मांग की है। उन्होंने अपनी याचिका में कहा है कि पार्टियां चुनावी घोषणा पत्र में जो भी वादे करती हैं उन्हें इसके लिए जवाबदेह बनाया जाए और घोषण पत्र के वादे पूरे ने होने पर उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की जाए।
अजमल ने अपनी याचिका में यह भी मांग की है कि चुनावी घोषणा पत्र में वादे पूरे न होने की दशा में रजिस्ट्रेशन भी रद्द कर दिया जाए।
अजमल ने अपनी याचिका में मौजूदा सपा सरकार पर अपने घोषणापत्र में मुसलमानों से किए वादे न पूरे करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा है कि सपा ने घोषणा पत्र में मुसलमानों को 18 प्रतिशत आरक्षण देने की बात कही थी, जो कि पूरा नहीं हुआ।
कोर्ट ने इस पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा जो वादे पूरे न करें उन पार्टियों का रजिस्ट्रेशन रद्द क्यों न कर दिया जाये। मामले पर हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच 5 सितम्बर को सुनवाई करेगी। बीते दिनों सदन में संसदीय कार्य मंत्री आजम खां ने कहा था कि समाजवादी पार्टी ने कभी भी प्रदेश के मुसलमानों को आरक्षण देने की कोई बात नहीं कही थी।
Courtesy: jagran. Com
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