Thursday, 9 February 2017

दोनों पक्षों के अटॉर्नी जनरलों पर बरसे अमेरिकी जज

सैन फ्रांसिस्को, प्रेट्र। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के यात्रा प्रतिबंध को अपीलीय कोर्ट में कड़े परीक्षण का सामना करना पड़ा। जजों के पैनल ने सरकार की इन दलीलों को खोखला बताया कि प्रतिबंध के पीछे की वजह आतंकवाद के कारण उपजा डर है। साथ ही उन्होंने उस अटॉर्नी से भी तीखे सवाल पूछे, जिसका दावा था कि इस प्रतिबंध से मुस्लिमों को असंवैधानिक तौर पर निशाना बनाया गया है।

सुनवाई सैन फ्रांसिस्को के सर्किट कोर्ट ऑफ अपील्स (नौवीं) में तीन जजों के समक्ष हुई। सुनवाई के केंद्र में यह बात थी कि प्रतिबंध को चुनौती देने की स्थिति में निचली अदालत द्वारा शासकीय आदेश पर लगी अस्थायी रोक को जारी रखा जा सकता है या नहीं। एक अनोखे कदम के तौर पर यह सुनवाई फोन पर की गई। इसका सीधा प्रसारण कोर्ट की वेबसाइट से किया गया।

करीब एक घंटे तक चली सुनवाई के दौरान न्याय विभाग के वकील अगस्त फ्लेंत्जे ने कहा कि ट्रंप का शासकीय आदेश पर हस्ताक्षर करना संवैधानिक अधिकार और दायित्व है। उन्होंने अदालत से शासकीय आदेश पर लगी रोक के फैसले को खारिज करने की मांग की। इस पर जज मिशेल फ्राइडलैंड ने उनसे पूछा, 'क्या सरकार के पास कोई सुबूत है कि इन देशों का आतंकवाद से संबंध है।'

जज रिचर्ड क्लिफटन ने वाशिंगटन और मिनेसोटा प्रांतों का पक्ष रख रहे अटॉर्नी से पूछा कि उनके पास क्या सुबूत है कि प्रतिबंध धर्म प्रेरित था। दोनों प्रांतों ने प्रतिबंध को चुनौती दी है। जज ने कहा, 'मुझे समझ नहीं आ रहा कि हम इसको धार्मिक भावना से क्यों जोड़ रहे हैं, जबकि वास्तव में मुस्लिमों का एक बड़ा तबका प्रभावित नहीं होगा।' माना जा रहा है कि कोर्ट ऑफ अपील्स जल्द ही फैसला सुना सकती है।

हालांकि ऐसी भी संभावना है कि आने वाले दिनों में यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच जाए। मालूम हो, ट्रंप ने सात मुस्लिम बहुल राष्ट्रों ईरान, इराक, लीबिया, सोमालिया, सूडान, सीरिया और यमन के नागरिकों के अमेरिका में प्रवेश पर अस्थायी प्रतिबंध वाले शासकीय आदेश पर हस्ताक्षर किए थे। हालांकि सिएटल की संघीय अदालत ने इसके क्रियान्वयन पर अस्थायी रोक लगा दी है।

Source:jagran.com

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