जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। अगले वित्त वर्ष के बजट में राजकोषीय प्रबंधन को लेकर सरकार की पहल से अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसियां संतुष्ट तो हैं, लेकिन राजस्व के मोर्चे पर उनकी चिंता अभी भी बनी हुई है। एजेंसियों का मानना है कि राजकोषीय प्रबंधन के रोडमैप को लागू करने के लिए राजस्व संग्रह को भी बनाये रखना जरूरी होगा। यदि सब कुछ तय नीति पर चला तभी आने वाले दिनों में भारत की रेटिंग में बदलाव संभव होगा।
दो दिन पूर्व संसद में पेश वित्त वर्ष 2017-18 के बजट को लेकर अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों का रुख सकारात्मक रहा है। लेकिन कुछ एजेंसियों ने बजट के कमजोर पहलुओं को भी उजागर किया है। मसलन मूडीज ने कहा है कि बजट में सरकार बैंकों के वित्त पोषण के लिए 10000 करोड़ रुपये की राशि मुहैया कराने को नाकाफी ठहरा है। एजेंसी ने इस पर चिंता जताते हुए कहा है कि यह बैंकिंग क्षेत्र के लिए क्रेडिट नेगेटिव है।
मूडीज की इन्वेस्टर सर्विसेज की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक राजकोषीय प्रबंधन के लिए किये गये सरकार के उपाय हासिल करने योग्य हैं। लेकिन इसमें सरकार की व्यय प्रतिबद्धताएं काफी महत्वपूर्ण हैं और राजस्व संग्रह की तेज वृद्धि की राह में संरचनात्मक बाधाओं पर ध्यान देना होगा। गौरतलब है कि सरकार ने अगले वित्त वर्ष के लिए 19.06 लाख करोड़ रुपये के राजस्व संग्रह का लक्ष्य रखा है। इसमें 9.80 लाख करोड़ रुपये प्रत्यक्ष करों से और 9.26 लाख करोड़ रुपये अप्रत्यक्ष कर संग्रह के मद में आने हैं।
सरकार के राजकोषीय घाटे में राज्यों की हिस्सेदारी को लेकर भी मूडीज ने चिंता जताई है। एजेंसी का मानना है कि राजस्व संग्रह में तेजी और आर्थिक विकास की मौजूदा दर को बनाये रखकर इसके लक्ष्यों को तो प्राप्त किया जा सकता है। लेकिन राज्यों का लगातार बढ़ रहा घाटा केंद्र और राज्य के संयुक्त राजकोषीय घाटे की स्थिति बिगाड़ सकता है। 2011-12 में राज्यों का घाटा उनके जीडीपी का दो फीसद था जो अब बढ़कर तीन फीसद तक पहुंच गया है।
उधर एक अन्य रेटिंग एजेंसी फिच का कहना है कि बजट में पेश सभी लक्ष्यों को प्राप्त करना संभव है। लेकिन एजेंसी की सलाह है कि सरकार को अपने कर आधार को विस्तार देने की आवश्यकता है। फिच के रेटिंग निदेशक थॉमस रुकमाकर का मानना है कि सरकार ने कर आधार के विस्तार के जरिए अर्थव्यवस्था के अनौपचारिक क्षेत्रों को मुख्यधारा में लाने की कोशिश कर रही है। लेकिन साथ ही श्रम सुधारों और एफआइपीबी खत्म करने के फैसले को अधिक विस्तार से समझाने की आवश्यकता है।
Source:jagran.com
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