सीबीएसई को इस बारे में विचार करना चाहिए और सामान्य बोलचाल की हिंदी का उपयोग करना चाहिए।
मनीष गोधा, जयपुर। क्षिप्त आवेग, प्रतिस्थिति विस्थापना, विपथन, वाक स्वराघात परिवर्तन। क्या आपने कभी ये शब्दावली सामान्य बोलचाल में सुनी है? निश्चित रूप से नहीं सुनी होगी। लेकिन ये शब्द रविवार को जम्मू-कश्मीर छोड़ देश भर में हुई राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (नेट) के प्रश्न पत्र में शामिल थे। ये ऐसी हिंदी है, जिसे समझने के लिए अंग्रेजी आना जरूरी है। इस तरह की कठिन हिंदी को देखकर ज्यादातर परीक्षार्थी तो चकरा गए। पूछे गए सवाल उनके सिर के ऊपर से गुजर गए।
नेट की परीक्षा केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की ओर से आयोजित की जाती है। परीक्षा में पहला प्रश्न पत्र सभी विषयों के परीक्षार्थियों के लिए कॉमन होता है और ऊपर दिए गए शब्द इस कॉमन प्रश्न पत्र से ही लिए गए हैं। परीक्षा का प्रश्न पत्र हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में होता है। एक पृष्ठ पर अंग्रेजी व सामने वाले पृष्ठ पर हिंदी में वही प्रश्न दिए होते हैं। यह परीक्षा देशभर के छात्र देते हैं। इनमें 90 प्रतिशत कॉलेज व विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले छात्र होते हैं। इनका हिंदी का ज्ञान सामान्य तो होता ही है, लेकिन सीबीएसई शायद उनसे अधिक की उम्मीद करता है। यानी इस दर्जे का कि वे कठिन से कठिन हिंदी को समझें और जवाब दें। शब्द को कठिन बनाने में सीबीएसई उसके व्यावहारिक पहलू की भी अनदेखी कर बैठता है। हिंदी का प्रश्नपत्र इसका उदाहरण है।
हालांकि इस प्रक्रिया से जुड़े लोगों का कहना है कि मूलत: प्रश्न पत्र अंग्रेजी में ही तैयार किए जाते हैं। प्रश्न पत्र पर लिखा भी होता है कि अंग्रेजी और हिंदी में यदि कोई विसंगति होगी तो अंग्रेजी वाला ही मान्य होगा। इस अंग्रेजी का ही हिंदी अनुवाद किया जाता है, लेकिन यह अनुवाद इतना कठिन है कि अच्छी हिंदी जानने- समझने वालों को भी सही अर्थ देखने के लिए अंग्रेजी में दिया गया प्रश्न देखना जरूरी हो जाता है। अन्यथा समझ में ही नहीं आएगा कि आखिर प्रश्न में पूछा क्या गया है? लेकिन बड़ा सवाल यह है कि जो अंग्रेजी का जानकार नहीं है, उसका क्या हश्र होगा? खासकर यह जानते हुए कि देश में महानगरों के बाहर अंग्रेजी की स्थिति अच्छी नहीं है।
इस सिलसिले में राजस्थान विश्वविद्यालय में जनसंचार व पत्रकारिता विभागाध्यक्ष डॉ. संजीव भानावत कहते हैं कि यह समस्या लंबे समय से बनी हुई है। अनुवाद के लिए सरकारी हिंदी का प्रयोग किया जाता है, जो बहुत ही कठिन होती है। सीबीएसई को इस बारे में विचार करना चाहिए और सामान्य बोलचाल की हिंदी का उपयोग करना चाहिए।
Courtesy: jagran. Com
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