उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने पिछले दिनों हजरतगंज चौराहे पर बसपा द्वारा किए गए प्रदर्शन को प्रशासनिक चूक माना है।
लखनऊ (जएनएन)। उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने पिछले दिनों हजरतगंज चौराहे पर बसपा द्वारा किए गए प्रदर्शन को प्रशासनिक चूक माना है। न्यायालय ने राज्य सरकार से पूछा है कि माहौल को नियंत्रित करने के लिए उसने क्या कार्रवाई की। जवाब देने के लिए राज्य सरकार को तीन सप्ताह का समय दिया गया है। अगली सुनवाई 23 अगस्त को होगी।
न्यायमूर्ति एपी शाही और न्यायमूर्ति विजय लक्ष्मी की खंडपीठ ने यह आदेश ममता जिंदल की याचिका पर दिए। न्यायालय ने कहा कि याचिका 57 साल की एक महिला द्वारा दाखिल की गई जिसमें उन्होंने कहा कि जब उनके नाबालिग बच्चे ने प्रदर्शन में लगाए जा रहे आपत्तिजनक नारों के बारे में सुना तो उनसे मतलब पूछा। उसको जवाब देना उनके लिए काफी मुश्किल था और वह इस नतीजे पर पहुंचीं कि सार्वजनिक रूप से की गई आपत्तिजनक टिप्पणी बालजीवन के लिए नुकसानदायक है। न्यायालय ने कहा कि 18वीं सदी के महान दार्शनिक पैट्रिक डेलनी ने कहा था कि तुम सब कुछ जो बोलते हो, उसे सोचो लेकिन वह सब जो सोचते हो, उसे मत बोलो। विषैले और गालीगलौज वाले बयान नफरत उत्पन्न करते हैं। वैसे तो संबंधित पहलुओं पर सुप्रीम कोर्ट ने व्याख्या की है लेकिन यहां मामला उस तीसरे व्यक्ति के हक का है, जिसका आपत्तिजनक बयानों से कोई सीधा ताल्लुक नहीं लेकिन उसे भी ऐसी भाषा सुननी पड़ती है।
Courtesy: jagran. Com
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