पर्यावरण अदालत ने चार अलग-अलग मामलों में दोषी पाए जाने पर पेड़ लगाने और उनकेे रख रखाव की सजा सुनाई है।
जागरण संवाददाता, कुरुक्षेत्र। विशेष पर्यावरण अदालत ने राष्ट्रीय राजमार्ग पर करनाल में चार ढाबा मालिकों को वन विभाग की जमीन पर अतिक्रमण करने व पेड़ों को नुकसान पंहुचाने पर 875 पौधे लगाने की सजा सुनाई है। यही नहीं दोषियों को इन पौधों की देखरेख भी करनी होगी। आदेशों में यह भी स्पष्ट है कि दोषी व्यक्ति को पीपल, नीम और बरगद या अन्य छायादार पौधे लगाने होंगे।
अदालत ने इन चारों लोगों को प्रोबेशन पर रिलीज किया है। अगर निर्धारित समयावधि में चारों लोगों का व्यवहार ठीक नहीं हुआ सजा के अनुसार निर्धारित पौधे नहीं लगाए तो कानून के अनुसार अगली कार्रवाई की जाएगी।
केस 1 : करनाल के वन अधिकारी ने 10 मई 2016 को वन अधिनियम 1927 की धारा 33 के अंतर्गत शिकायत दर्ज कराई थी। इसके तहत करनाल के मंगलौरा निवासी मनजीत ने जीटी रोड केएम 104-1 यमुना बेल्ट मेरठ रोड जीटी रोड क्षेत्र में सरकार की 960 स्क्वेयर फीट जमीन पर अतिक्रमण कर वन विभाग के 125 पौधों को नष्ट कर दिया था।
दोनों पक्षों को सुनने के बाद पर्यावरण कोर्ट ने फैसला सुनाते आरोपी को दोषी करार दिया। विशेष पर्यावरण अदालत ने दोषी को 500 पौधे हर्बल पार्क में लगाने के आदेश दिए है। आदेशों में यह भी स्पष्ट कहा गया हैं कि दोषी व्यक्ति को पीपल, नीम और बरगद (त्रिवेणी) या अन्य किस्म के पेड़ ही लगाने होंगे।
केस 2 : वहीं विशेष पर्यावरण अदालत के पीठासीन अधिकारी अनिल कौशिक ने दूसरे मामले में ढाबा मालिक बरयाम सिंह को 130 स्क्वेयर मीटर जमीन पर अतिक्रमण करने और वन विभाग के पेड़ों को नुकसान पहुंचाने का दोषी पाते हुए 125 पौधे किसी गांव या मंदिर में लगाने के आदेश दिए हैं।
केस 3 : कोर्ट ने तीसरे केस में घरौंडा निवासी अशोक को वन विभाग की 78 स्क्वेयर मीटर जमीन पर कब्जा करने और पौधों को नुकसान पहुंचाने पर 80 पौधे लगाने के आदेश दिए हैं।
केस 4 : पर्यावरण कोर्ट ने चौथे मामले में करनाल निवासी अशोक को जीटी रोड क्षेत्र में करनाल रेंज में 84.5 स्क्वेयर मीटर जमीन पर अतिक्रमण करने और पौधों को नुकसान पहुंचाने पर 70 पौधे लगाने का आदेश दिया हैं।
Courtesy:jagran. Com
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