Friday, 8 July 2016

अहम जिम्मेवारी के लिए राजनीतिक कद की बजाय काम-काज से तय होगा कद

केंद्रीय मंत्रिमंडल में हुए हालिया फेरबदल से एक बाद स्पष्ट हो गई है कि अहम जिम्मेवारी के लिए कैबिनेट पद या राजनीतिक कद को तवज्जो नहीं मिलेगी।

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंत्रिमंडल के ताजा फेर-बदल में एक बार फिर साफ कर दिया है कि सरकार में मंत्रियों की हद उनके काम-काज से ही खिंचेगी उनके राजनीतिक कद या कैबिनेट के पद से नहीं।

अब भी सरकार में पेट्रोलियम, ऊर्जा, पर्यावरण, वाणिज्य और उद्योग जैसे मंत्रालय राज्य मंत्रियों के ही जिम्मे रहेंगे। ये ऐसे मंत्रालय हैं, जिनको हमेशा से बेहद अहम मान कर सिर्फ कद्दावर नेताओं को ही सौंपा जाता रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन तमाम अटकलों को गलत साबित कर दिया है, जिनमें कहा जा रहा था कि पीयूष गोयल और धर्मेद्र प्रधान को उनके मंत्रालयों की अहमियत देखते हुए कैबिनेट का ओहदा दे दिया जाएगा। पीयूष गोयल के पास अब भी ऊर्जा, कोयला, नवीन और नवीकरनीय ऊर्जा व खान मंत्रालय हैं, लेकिन वे भी उन एक दर्जन मंत्रियों में शामिल हैं, जिन्हें राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार के रूप में जिम्मेवारी पूरी करनी है। यही हाल धर्मेद्र प्रधान का भी है, जो पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस जैसे भारी-भरकम मंत्रालय को संभाल रहे हैं।

ऐसे मंत्री आम तौर पर कैबिनेट की बैठक में शामिल नहीं होते। इनके मंत्रालय का मुद्दा होने पर ही इन्हें इस बैठक में बुलाया जाता है।

इसी तरह अनिल माधव दवे और मनोज सिन्हा को इस बार प्रधानमंत्री ने बहुत अहम जिम्मेवारी दी, मगर राज्य मंत्री के तौर पर ही। दवे जहां पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन का काम देखेंगे, वहीं मनोज सिन्हा रेलवे में राज्य मंत्री रहते हुए अब संचार मंत्रालय को अकेले ही संभालेंगे। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय को निर्मला सीतारमण राज्य मंत्री के तौर पर संभाल रही हैं। तेलंगाना के कद्दावर नेता होने के बावजूद बंडारू दत्तात्रेय को भी श्रम और रोजगार मंत्रालय को राज्य मंत्री के तौर पर ही चलाना पड़ रहा है।

Courtesy: jagran. Com

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