Friday, 1 April 2016

बिहार बेसहारों का पेट भर उनका आत्मविश्वास जगा रही युवाओं की टोली

बिहार बेसहारों का पेट भर उनका आत्मविश्वास जगा रही युवाओं की टोली

जहानाबाद की संस्था ‘एक रोटी’ के युवा सदस्य बेसहारा बुजुर्गों के लिए देवदूत बन रहे हैं। युवाओं की यह टोली बुजुर्गों की सेवा के लिए तत्पर रहती है। बुजुर्ग स्टेशन पर भीख न मांगें, इसके लिए टोली भोजन की व्यवस्था करती है। सदर अस्पताल में इलाज कराने आए गरीब मरीज के परिजन को एक रोटी के सदस्य चूड़ा और भूंजा मुहैया करा रहे हैं ताकि  उन्हें इलाज में किसी प्रकार की असुविधा न हो।

दो माह पहले हुआ संस्था का गठन: दो माह पहले संस्था का गठन हुआ है। जयपुर में इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे अमनदीप ने अपने कामकाजी स्थानीय दोस्तों विकास सिंह, अमित कुमार, सन्नी कुमार और परिणय शर्मा आदि के साथ लोगों को भूखे न सोने देने के लिए इस अभियान की शुरुआत की। 

सबका मिल रहा है समर्थन: इन उत्साही युवकों को इस अनूठे कदम का शहरवासियों ने भी भरपूर समर्थन मिल रहा है। फिलहाल लोकनगर, श्यामनगर और गांधी मैदान मोहल्ले के करीब 40-50 परिवारों ने असहायों को भोजन देना स्वीकार किया। सभी घरों में स्थायी रूप से एक-एक टिफिन रखा रहता है। टिफिन में रोटी, सब्जी और अन्य प्रकार के व्यंजन भर दिए जाते हैं। टीम के सबसे बुजुर्ग सदस्य बसंत शर्मा साइकिल से बर्तन लेकर आते हैं। टिफिन की खाद्य सामग्री को भर कर उसे एक जगह एकत्र किया जाता है। फिर रेलवे स्टेशन और सदर अस्पताल जाकर ‘एक रोटी’ टीम के युवक जरूरतमंदों को खाना परोसते हैं। भोजन देने वाले परिवार के घर में अगर कोई समारोह है, तो उस दिन बेसहारों को लजीज व्यंजन भी मिल जाता है। 

भिक्षावृति से मुक्ति दिलाना है उद्देश्य: अमनदीप कहते हैं कि ‘एक रोटी’ अभियान का मुख्य उद्देश्य बेसहारों और गरीब बच्चों को भिक्षावृत्ति से मुक्त दिलाना है। महोबा और बुलंद शहर के रोटी बैंक से इस कार्यक्रम को बिल्कुल मानते हैं। वे कहते हैं - बेसहारों और गरीब बच्चों को अगर भरपेट खाने को मिल जाएगा तो उन्हें आने-जाने वाले लोग भी भीख देने से मना करने लगेंगे। जब ऐसे लोगों को भीख नहीं मिलेगी तो भिक्षावृत्ति के सरगना का कारोबार भी ठप होगा। ठेला-खोमचा या होटल में खाना खा रहे लोगों को घूरते बच्चों में भी भीख मांगने की प्रवृत्ति रुकेगी। टीम के सदस्य उनका आत्मविश्वास भी जगा रहे हैं। जिन घरों से भोजन मिलता है, उन्हें बेसहारों को काम देने के लिए भी राजी किया जा रहा है।

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