विधायिका के प्रति जवाबदेह हो CAG, बदले जाए पुराने पड़े कानूनः संसदीय समिति
नई दिल्ली : संसद की एक समिति ने लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन को एक रिपोर्ट सौंपी जिसमें सिफारिश की गई है कि कैग को विधायिका के प्रति जवाबदेह बनाया जाए और ‘पुराने पड़ चुके’ कानून को बदला जाए।
लोक लेखा समिति को मजबूत करने के लिए बनी उप समिति ने यह भी मांग की है कि नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) को ‘गैर सरकारी संगठनों और सरकार के धन से संबंधित उपक्रम या कार्यक्रम का ऑडिट करने की इजाजत दी जाए।’ उसने कहा कि पीएसी को न सिर्फ कैग रिपोर्ट की छानबीन करनी चाहिए बल्कि स्वत: संज्ञान लेते हुए मुद्दों का चयन भी करना चाहिए।
रिपोर्ट में कहा गया है कि कैग की संस्था को आगे मजबूत करने की जरूरत है जो सरकारी विभागों और संस्थानों का ऑडिट करती है। समिति ने कहा, 'कैग अधिनियम-1971 पूरी तरह से पुराना पड़ चुका है और इसे बदलने की जरूरत है। एक ऐसी व्यवस्था की भी जरूरत है कि कैग संसद के नियंत्रण के बिना उसे प्रति जवाबदेह हो। हर साल इसका बजट बढ़ना चाहिए।
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