Friday, 29 April 2016

भारत पापुआ न्यू गिनी में करेगा 664 करोड़ का निवेश

पोर्ट मोरेस्बी (प्रेट्र)। द्विपक्षीय संबंधों को मजबूती देते हुए भारत ने शुक्रवार को पापुआ न्यू गिनी (पीएनजी) में 100 मिलियन डॉलर (करीब 664 करोड़ रुपये) के निवेश का प्रस्ताव रखा। इससे मित्र देश में ऊर्जा की सुरक्षा और आधारभूत ढांचे का विकास संभव हो सकेगा। दोनों देश प्रशांत क्षेत्र के इस देश में मिलकर तेल और गैस निकालने और उसके शोधन पर सहमत हो गए हैं। यह फैसला राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और पापुआ न्यू गिनी के उनके समकक्ष सर माइकल ओचिओ के साथ बैठक में हुआ।

भारत ने मित्र देश को तटवर्ती इलाकों पर नजर रखने के लिए रडार और तटवर्ती इलाकों की सुरक्षा के लिए गश्ती नौका देने का भी प्रस्ताव रखा है। इससे पापुआ न्यू गिनी की समुद्री सुरक्षा मजबूत हो सकेगी। प्रणब के दो दिवसीय दौरे में दोनों देशों के बीच कई द्विपक्षीय व अंतरराष्ट्रीय मसलों पर चर्चा हुई। इनमें खासतौर से आतंकवाद और सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता का मसला शामिल है। दोनों देशों में विचारों के आदान-प्रदान के लिए विदेश मंत्री स्तर की नियमित वार्ता की भी सहमति बनी।

तेल और गैस निकालने और उनके शोधन में दोनों देशों की सरकारी और निजी कंपनियां शामिल होंगी। इसके लिए संयुक्त उपक्रम स्थापित होगा और भारत उसके लिए निवेश करेगा। भारतीय पर्यटकों को पापुआ न्यू गिनी जाने पर वीजा ऑन अराइवल की सुविधा मिलेगी। उन्हें वीजा के लिए लंबी प्रक्रिया को नहीं अपनाना पड़ेगा। भारत ने पापुआ न्यू गिनी के एड्स पीडि़त 20 हजार लोगों के लिए दवाएं और उपकरण उपलब्ध कराने की भी घोषणा की। अपने दौरे में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी वार मेमोरियल भी गए और वहां पर द्वितीय विश्वयुद्ध में शहीद हुए भारतीय सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की। ये सैनिक ब्रिटिश सेना की ओर से लड़े थे।

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