Wednesday, 6 April 2016

मुंबई की चकाचौंध के पीछे छिपी है तनाव भरी जिंदगी

मुंबई की चकाचौंध के पीछे छिपी है तनाव भरी जिंदगी   


जमशेदपुर की टीवी कलाकार प्रत्युषा बनर्जी की मौत से झारखंड से लेकर मुंबई तक के लोग सदमे में हैं। प्रत्युषा  की मौत ने मायानगरी मुंबई की चकाचौंध के पीछे छिपे दर्द को उभारकर सामने रख दिया है। मुंबई में अपनी पैठ जमाने वाले धनबाद के कलाकारों की मानें तो मुंबई की लाइफ में सफलता के लिए भारी तनाव के बीच बेहतर काम करने की चुनौती रहती है। 

धनबाद के आधा दर्जन से अधिक लोग मुंबई में बड़े और छोटे पर्दे पर काम कर रहे हैं। इन कलाकारों ने कहा कि मुंबई में लगातार काम करने से जो तनाव मिलता है,  उसके साथ निजी जिंदगी में सामंजस्य बिठाना मुश्किल है। कुछ कलाकारों ने अपनी पीड़ा साझा की

बॉलीवुड में टिके रहना चुनौती : जीशान 
गैंग्स ऑफ वासेपुर फेम जीशान कादरी कहते हैं कि एक फिल्म मिलने के बाद दूसरी फिल्म पाने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ती है। टैलेंट के बावजूद लोग ध्यान नहीं देते। आपके हुनर से अधिक यहां पहुंच काम आती है। फिल्में हिट होती रहें इसका भी दबाव रहता है।

पूरी रात तक होती है शूटिंग : अर्पिता 
धनबाद की रहने वाली अर्पिता माली कहतीं हैं कि मुंबई बाहर से जैसी दिखती है अंदर से वैसी नहीं। यहां न काम के घंटे तय हैं और न समय। इनसब के बावजूद बेहतर करने का दबाव रहता है। फिल्मों में काम पाना और उसमें बने रहने का भी दबाव रहता है। 

कलाकार की निजी जिंदगी नहीं : पूजा 
छोटे पर्दे पर भी कलाकारों को उतना ही दबाव झेलना पड़ता। किसी भी शो में चयन होना और उसमें बेहतर करने का दबाव रहता है। कभी कभी तो पूरी रात गाने की रिकार्डिंग होती है और दूसरे दिन भी सुबह बुला लेते हैं। काफी तनाव के बीच हम कलाकारों की जिंदगी बीतती है।
  
घर के लिए नहीं मिलता समय : लबोनी 
कई भोजपुरी और स्थानीय फिल्मों में काम कर चुकी लबोनी चटर्जी कहतीं हैं कलाकारों की लाइफ स्टाइल बहुत खराब है। देर रात जगने से स्वास्थ्य पर असर पड़ता है। घरवालों से दूर रहने से भी जिंदगी अधूरी लगती है। काम का दबाव इतना रहता है कि रातों को नींद भी नहीं आती।  

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