2030 तक वैश्विक शहरी खपत में हो सकती है 23 अरब डॉलर की वृद्धि: रिपोर्ट
नई दिल्ली। मैकेंजी ग्लोबल इंस्टीट्यूट की एक रिपोर्ट में कहा है कि 15 वर्षों के दौरान वैश्विक शहरी खपत में 3.6 फीसदी की वार्षिक वृद्धि के साथ 23 अरब डॉलर की वृद्धि हो सकती है। रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली और मुंबई सहित विश्व के 32 शहर 2015 से 2030 के बीच कुल शहरी खपत में एक-चौथाई योगदान दे सकते हैं। भारत में वस्तुओं और सेवाओं की मांग बढ़ने के अलावा लाखों लोगों की आवश्यकताओं में वृद्धि होने के साथ यहां संचार, परिवहन, रेस्तरां, खानपान जैसी सेवाओं की खपत बढ़ रही है।
2030 तक बड़े शहरों में रहने वाले उपभोक्ता वैश्विक खपत में 81 फीसदी का योगदान देंगे जो एक "असाधारण" बात होगी। रिपोर्ट में दो महत्वपूर्ण प्रवृत्तियों का जिक्र किया गया है, जिसमें विकसित क्षेत्रों में उपभोक्ताओं द्वारा उम्र बढ़ने पर स्वास्थ्य देखभाल पर भारी खर्च करना और उभरती अर्थव्यवस्थाओं में उपभोक्ताओं द्वारा खर्च में बढोत्तरी करना शामिल है। रिपोर्ट में इस बात का जिक्र है कि 2025 तक भारत में इस तरह के खर्च का औसत घरेलू खपत का 35 फीसदी होगा और मैकेंजी ग्लोबल इंस्टिट्यूट को इस हिस्सेदारी 70 फीसदी की वृद्धि होने की उम्मीद है।
रिपोर्ट में कहा गया कि भारतीय शहरों की जनसंख्या विविधता और उम्र बढ़ना दूसरों की तुलना में विशिष्ट शहरों को अधिक प्रभावित करेगा। रिपोर्ट के अनुसार भारत के सभी शहरों में उम्र तेजी से बढ़ रही है, विशेषकर केरल में। इसके अलावा, मुंबई, दिल्ली, अहमदाबाद, हैदराबाद और बेंगलूरु में खपत वृद्धि पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2015-2030 तक भारत की खपत वृद्धि में 70 फीसदी योगदान कामगार उम्र समूह वाली जनसंख्या (15-59 की उम्र) का होगा, जबकि 60 से अधिक उम्र वालों का योगदान 10 फीसदी प्रतिवर्ष रहेगा।
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