MBBS में प्रवेश के लिए NEET दो चरणों में ही होगी, सुप्रीम कोर्ट का अंतरिम आदेश से इनकार
सुप्रीम कोर्ट ने MBBS, BDS और PG में प्रवेश के लिए देशभर में एक ही परीक्षा NEET(नेशनल एलिजबिलटी एंट्रेंस टेस्ट) पर अंतरिम आदेश जारी करने से मना कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि दो फेज में होने वाली यह परीक्षा अभी के लिए ठीक है। इससे पहले केंद्र सरकार ने फैसले में बदलाव की अपील की थी। अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने जस्टिस एआर दवे और एके गोयल की बैंच के सामने याचिका दायर की। उन्होंने सरकार की ओर से कहा कि मेडिकल में प्रवेश के लिए राज्यों को अलग परीक्षा कराने की अनुमति दी जाए। रोहतगी ने साथ ही कहा कि एक मई को होने वाली परीक्षा को रद्द कर 24 जुलाई को एक ही परीक्षा ली जाए।
बता दें कि गुरुवार को उच्चतम न्यायालय ने एमबीबीएस, बीडीएस और पीजी में प्रवेश के लिए एक ही परीक्षा नीट कराने का फैसला दिया था। इसके तहत विभिन्न मेडिकल कॉलेजों की MBBS की 52 हजार सीटों पर NEET के माध्यम से प्रवेश देने की योजना है। अटॉर्नी जनरल रोहतगी ने कहा कि इस फैसले को लेकर भ्रम की स्थिति है। महाराष्ट्र सरकार ने भी इस फैसले पर आपत्ति जताई थी।
कोर्ट के आदेश के मुताबिक, एमबीबीएस, बीडीएस और पीजी कोर्सेज में NEET के जरिए दाखिले के लिए दो चरणों में सिंगल कॉमन एंट्रेंस टेस्ट होगा। NEET का पहला फेज एक मई को होगा, जबकि दूसरा फेज 24 जुलाई को होगा। संयुक्त परीक्षा परिणाम 17 अगस्त को घोषित किया जाएगा। NEET को लेकर याचिकाकर्ता ने एनजीओ की रिसर्च के हवाले से दावा किया था कि निजी और सरकारी प्राधिकारियों द्वारा अलग-अलग 90 प्रवेश परीक्षाओं का आयोजन किया जाता है। इसमें लाखों रूपये खर्च होते हैं।
एमबीबीएस, बीडीएस और पीजी कोर्सेज में NEET के जरिए दाखिले के लिए दो चरणों में सिंगल कॉमन एंट्रेंस टेस्ट होगा।
केंद्र और एमसीआई ने जो प्रस्ताव रखा था, उसके अनुसार मई में होने वाली ऑल इंडिया पीएमटी परीक्षा को एनईईटी-1 को माना जाएगा। दूसरे चरण को एनईईटी-2 माना जाएगा। इसका आयोजन 24 जुलाई को होगा और 17 अगस्त को संयुक्त परिणाम घोषित किए जाएंगे। इस व्यवस्था को ही सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को मंजूरी दी थी। कोर्ट के इस फैसले पर तमिलनाडु की ओर से भी आपत्ति जताई गई थी। इसकी ओर से कहा गया कि राज्य में वर्ष 2007 के बाद से प्रवेश परीक्षाओं की कोई संस्कृति नहीं है।
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