Friday, 29 April 2016

वित्त मंत्री अरुण जेटली का सोने के आभूषणों पर लगाया गया उत्पाद शुल्क हटाने से इनकार

नई दिल्ली
वित्त मंत्री अरुण जेटली ने गुरुवार को राज्यसभा में कहा कि देश को इस पर फैसला करना है कि क्या सोने जैसे लग्जरी चीजों को टैक्स के दायरे से बाहर रखकर बच्चों के खाने का सामान, साबुन, टूथपेस्ट और जूते जैसी जरूरी चीजों पर उत्पाद शुल्क लगाया जाए।

इसके साथ ही वित्त मंत्री ने सोने के आभूषणों पर लगाए गए एक प्रतिशत के उत्पाद शुल्क को हटाने से इंकार करते हुए कहा कि विलासिता की वस्तुओं को अनिश्चितकाल के लिए कर दायरे से बाहर नहीं रखा जा सकता। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले में आभूषण कारोबारियों को किसी भी तरह से परेशान नहीं किया जाएगा।

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने स्वर्ण आभूषणों पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क लगाए जाने और इसके कारण देश के सर्राफा व्यापारियों में उत्पन्न रोष के विषय पर ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर मांगे गए स्पष्टीकरणों के जवाब में राज्यसभा में यह बात कही। उन्होंने कहा कि यदि सरकार विलासिता वाली वस्तुओं पर टैक्स नहीं लगाती है तो इसका मतलब है कि इसकी भरपाई करने के लिए उसे आवश्यक जिंसों पर कर लगाना पड़ेगा।

इस मुद्दे पर वित्त मंत्री के जवाब से असंतोष जताते हुए कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के सदस्यों ने सदन से वॉकआउट किया। इससे पहले जेटली ने कहा कि सोने पर सीमा शुल्क इसलिए नहीं बढ़ाया जा सकता क्योंकि इससे देश में सोने की तस्करी बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि देश में सोने और उसके आभूषणों की मांग पारंपरिक रूप से रही है।

वित्त मंत्री ने कहा कि सोने के बड़े कारोबारी जो वैट चालान भरते हैं उसी के आधार पर उन्हें उत्पाद शुल्क देना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि इसके लिए उत्पाद शुल्क विभाग की ओर से कोई भौतिक जांच नहीं की जाएगी। उन्होंने बताया कि सरकार ने वित्त मंत्रालय के पूर्व सलाहकार अशोक लाहिड़ी की अध्यक्षता में एक समिति बनाई है जो आभूषण कारोबारियों को उत्पाद शुल्क के मामले में किसी भी तरह की परेशानी से बचाने के उपायों पर अपनी सिफारिश

जेटली ने कहा कि अभी तक 206 आभूषण कारोबारियों ने अपना पंजीकरण करवाया है। समिति के गठन को देखते हुए पंजीकरण की अंतिम तिथि को बढ़ाकर 30 जून कर दिया गया है। वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि उत्पाद शुल्क लगाने के कदम से छोटे कारोबारियों एवं कर्मचारियों पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

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