MCD कर्मियों की हड़ताल छठे दिन भी जारी, LG ने बुलाई आपात बैठक
नई दिल्ली। दिल्ली नगर निगम (MCD) के कर्मचारियों की हड़ताल का आज छठा दिन है। दिल्ली नगर निगम और दिल्ली सरकार के अड़ियल रुख को देखते हुए छठे दिन भी हड़ताल खत्म होने की कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही। वहीं, मामले की गंभीरता को देखते हुए उपराज्यपाल ने आपात बैठक बुलाई है। इसमें संबंधित सभी अधिकारियों को तलब किया गया है।
आज सुबह से ही नगर निगम के एक लाख से अधिक कर्मचारियों का धरना प्रदर्शन चल रहा है। कल तक वेतनमान न मिलने के मुद्दे पर अरविंद केजरीवाल सरकार को घेरने वाले हड़ताली कर्मियों ने आज शहरी विकास मंत्री वैंकेया नायडू के आवास के बाहर जमकर प्रदर्शन किया।
प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली नगर निगम को आजाद करने की बात कही। इस मौके पर प्रदर्शनकारी 'बीजेपी वालों इस्तीफा दो' के नारे भी लिखे हुए थे।
नगर निगम शाहदरा उत्तरी जोन की अध्यक्ष स्वाति गुप्ता के नेतृत्व में जीटीबी अस्पताल चौक पर प्रदर्शन किया गया। इस मौके पर स्वाति गुप्ता ने इस्तीफे की पेशकश भी की। उन्होंने कहा कि उनके इस्तीफा देने से कर्मचारियों को वेतन व फंड आप सरकार दे देती है, तो वह इसके लिए तैयार हैं।
आम आदमी पार्टी सरकार के खिलाफ स्वामी दयानंद अस्पताल के डॉक्टरों ने रैली निकली और हड़ताल के समर्थन का एलान भी किया।
बकाया वेतनमान की मांग को लेकर दिल्ली नगर निगम के हड़ताल कर्मचारियों ने जगतपुरी में जमकर प्रदर्शन किया। इस मौके पर उन्होंने प्रदर्शन जारी रखने का भी एलान किया।
इस बीच भारतीय जनता पार्टी ने आज समाचार पत्रों में विज्ञापन देकर आम आदमी पार्टी पर हमला किया है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष के नेतृत्व में जारी विज्ञापन में केजरीवाल सरकार पर निगम चुनाव के लिए राजनीति करने का आरोप लगाया है।
विज्ञापन में कहा गया है कि दिल्ली में निगमों के कर्मचारी आज अपने बच्चों की फीस, दवा, रोटी और पढ़ाई के लिए अपने वेतन की मांग को लेकर हड़ताल पर हैं, परंतु दिल्ली की केजरीवाल-सिसोदिया सरकार निगम चुनाव जीतने के लिए अभी से चुनावी बिसात बिछा रही है।
विज्ञापन में आंकड़ों के साथ यह भी बताया गया है कि निगम को कितना पैसा मिला और कहां पर खर्च किया गया है। इसके साथ ही चौथे वित्त आयोग को तुरंत लागू करने की मांग की गई है।
आप ने भाजपा से पूछे सात सवाल
दिल्ली नगर निगम के सफाई कर्मचारियों द्वारा की जारी रही हड़ताल की आम आदमी पार्टी (आप) ने निंदा की है। आप ने दिल्ली नगर निगमों में बड़े पैमाने पर वेतन घोटाला और अव्यवस्था का आरोप लगाया है। पार्टी ने नगर निगमों के मौजूदा हालात पर निगम में सत्तासीन भाजपा से सात सवालों का जवाब मांगा।
1. क्या तीनों नगर निगमों को प्लान और नॉन प्लान हेड के तहत दिल्ली सरकार से धनराशि नहीं मिली है?
2. दिल्ली सरकार द्वारा नगर निगमों को कब और कितनी धनराशि दी गई है?
3. क्या डीडीए से संपत्ति कर के तौर पर 1555 करोड़ रुपये नगर निगमों को नहीं लेने हैं?
4. पार्किंग शुल्क दो गुना होने के बावजूद मिलने वाली धनराशि कहां गई?
5. निगमों के संपत्तिकर में लगातार गिरावट क्यों हो रही है?
6. क्या यह सही नहीं है कि 30 अक्टूबर 2014 को दिल्ली उच्च न्यायालय ने टिप्पणी की थी कि स्वच्छ भारत अभियान को निगमों ने मात्र रस्म अदायगी बना दिया है?
7. क्या दिल्ली उच्च न्यायालय ने 5 नवंबर 2014 को निगमों पर डर्टी इंडिया कैंपेन चलाने की टिप्पणी नहीं की थी?
महापौर ने जारी किए आंकड़े, जांच के लिए तैयार
उत्तरी दिल्ली नगर निगम के महापौर रविंद्र गुप्ता ने दिल्ली सरकार की तरफ से आए नॉन प्लान के मद में आए फंड का ब्योरा सार्वजनिक किया। उन्होंने कहा कि निगम के खाते नियमों के तहत ऑडिट होते हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार को राजनीति छोड़ कर निगमों को मजबूत करने की दिशा में काम करना चाहिए।
चार वर्ष में दिल्ली सरकार की ओर से निगम को दिए गए फंड के बारे में बताते हुए महापौर ने बताया कि सरकार ने निगम को कमजोर करने के लिए उनके हक का पैसा नहीं दिया है। साल 2012-13 में निगम ने 1789 करोड़ रुपये वेतन पर खर्च किए, जबकि दिल्ली सरकार की तरफ से नॉन प्लान हेड में 487 करोड़ रुपये दिए गए।
2013-14 में 2138 करोड़ रुपये वेतन पर खर्च किए गए, जबकि दिल्ली सरकार की तरफ से 531 करोड़ रुपये इस मद में आए। 2014-15 में 2137 करोड़ रुपये वेतन पर खर्च किए गए, जबकि दिल्ली सरकार ने 546 करोड़ रुपये दिए।
वहीं, 2015-16 में 1995 करोड़ रुपये वेतन पर खर्च किए गए और दिल्ली सरकार से 890 करोड़ रुपये आए। उन्होंने कहा कि निगम के खातों में ऐसा कुछ नहीं है जो छिपाया जाए। दिल्ली सरकार खातों की जांच करना चाहती है तो करे, लेकिन निगमों के कर्मचारियों को वेतन दे दे।
बेशक इसका श्रेय वे खुद ले सकते हैं। हड़ताल से दिल्ली की जनता परेशान है। इसलिए दिल्ली सरकार को निगमों के कर्मचारियों को वेतन दे कर समस्या का हल कर लें।
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