किराए की कोख से बनी मां को भी मिले मातृत्व अवकाश
मुंबई: किराए की कोख लेकर (सरोगेसी) मां बनने वाली महिला भी छह महीने का मातृत्व अवकाश लेने की हकदार है। यह बात बांबे हाई कोर्ट ने कही है।
जस्टिस अनूप मोहता और जीएस कुलकर्णी की पीठ ने कहा, बचे की देखभाल करने के लिए मिलने वाले अवकाश संबंधी नियम को नहीं बदला जा सकता, भले ही महिला सरोगेसी से मां बनी हो। पीठ ने यह फैसला सेंट्रल रेलवे की एक महिला कर्मी की याचिका पर दिया है। याची के मातृत्व अवकाश संबंधी प्रार्थना पत्र को अस्वीकृत कर दिया गया था। इसके विरोध में उसने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की।
हाई कोर्ट ने याचिका की सुनवाई करके महिला कर्मी को 180 दिन का अवकाश स्वीकृत करने का आदेश दिया है। आदेश में कहा गया है कि याची ने भले ही बचे को जन्म नहीं दिया है लेकिन देखभाल में उसकी अहम भूमिका है। वह शिशु के देखभाल की जिम्मेदारी किसी और को नहीं दे सकती है। इसलिए उसे मातृत्व अवकाश मिलना आवश्यक है।
याची की शादी सन 2004 में हुई थी। लंबे वैवाहिक जीवन में वह गर्भवती नहीं हो सकी। तब उसने सरोगेसी से मां बनने का फैसला किया। उसने बाकायदा एक महिला से समझौता किया। सरोगेट मदर ने जब 33 सप्ताह की गर्भावस्था पूरी कर ली तब रेलवे कर्मी महिला ने मातृत्व अवकाश के लिए कार्यालय में अर्जी दी थी। याची की ओर से वकील संदीप शिंदे और तान्या गोस्वामी ने दलील पेश करते हुए नागपुर हाई कोर्ट के फैसले की नजीर भी पेश की।
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