MCD कर्मियों की हड़ताल पर 7वें दिन भी जारी, मांग रहे 'भीख'
नई दिल्ली। दिल्ली नगर निगम के सफाई कर्मचारियों की हड़ताल का आज सातवां दिन है। दिल्ली में जगह-जगह प्रदर्शन हो रहे हैं। निगम कर्मचारियों ने आज दोपहर राजघाट पहुंचकर प्रदर्शन किया। वहीं, पूर्वी दिल्ली नगर निगम कार्यालय पर प्रदर्शनकारियों ने सांकेतिक तौर पर भीख तक मांगी। लोगों ने बैनर भी ले रखे थे, जिस पर लिखा था, 'अच्छे दिन आ गए हमारा वेतन खा गए'।
MCD हड़ताल पर LG की टिप्पणी, बताया 'दिल्ली में आर्थिक आपातकाल'
इस पर आज दिल्ली के उपराज्यपाल ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने खत लिखकर तल्ख टिप्पणी की है।उपराज्यपाल ने खत में कहा कि दिल्ली में आर्थिक आपातकाल की स्थिति है। हड़ताल के चलते कानून व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने का खतरा भी पैदा हो गया है। उन्होंने दिल्ली नगर निगम का कहा है कि वह दिल्ली सरकार से लोन लेकर अपने काम निपटाए।
वहीं, दिल्ली सरकार और निगम के बीच बातचीत की कोई उसे उम्मीद नहीं होने के बाद अब सबकी नजरें हाईकोर्ट पर टिक गई हैं। निगमकर्मियों को वेतन नहीं मिलने के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट में आज सुनवाई है। अब अदालत ही तय करेगी कि कूड़ा कौन उठाए?
विवाद सुलझाने की कड़ी में थोड़ी देर बाद दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष सतीश उपाध्याय राजधानी में नगर निगम कर्मचारियों के मुद्दों को लेकर चर्चा करने के लिए उपराज्यपाल सतीश उपाध्याय से मिलेंगे।
वहीं, इस हड़ताल से जगह-जगह कूड़ा फैला हुआ है। इस हड़ताल में सफाई कर्मचारी, एमसीडी के सात अस्पतालों और सभी डिस्पेंसरी के डॉक्टर और नर्स हड़ताल व एमसीडी स्कूलों के शिक्षक भी हड़ताल पर है।
दिल्ली सरकार और दिल्ली नगर निगम के बीच फंड को लेकर टकराव जारी है। दोनों अपने-अपने आंकडे दे रहे है। दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने प्रेस कांफ्रेन्स में कर दावा किया कि आम आदमी पार्टी की मौजूदा सरकार ने पिछली कांग्रेस की सरकार और एलजी के शासनकाल की तुलना में एमसीडी को सैलरी के लिए ज्यादा रकम दी है।
एक अनुमान के मुताबिक नगर निगम प्रतिदिन समूची दिल्ली से लगभग 8500 मीट्रिक टन कूड़ा उठाती है। इससे शहर में बीते पांच दिनों में कूड़े से उपजी गंदगी का अंदाजा लगाया जा सकता है।
वहीं, हाईकोर्ट ने हड़ताल शुरू होने के दिन ही दिल्ली पुलिस आयुक्त को यह सुनिश्चित करने को कहा था कि सरकार या किसी अन्य एजेंसी द्वारा कूड़ा उठाने के काम में हड़ताली कर्मचारी या कोई अन्य व्यक्ति किसी तरह की बाधा न पहुंचाए।
वहीं, बेंगलुरू में इलाज करा रहे मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने हड़ताली कर्मचारियों के साथ सुलह से परहेज करते हुए साफ संकेत दिया है कि अब विवाद का फैसला अदालत ही करेगी। बेंगलुरू में केजरीवाल ने कर्मचारियों की वेतन की मांग जायज ठहराते हुए कहा 'हम कह रहे हैं कि सरकार ने निगमों को पूरे साल का सारा पैसा दे दिया है।
भाजपा कह रही है कि पैसा नहीं मिला। कौन सही है। कोर्ट में सुनवाई है। वहाँ निर्णय हो जाएगा। दो दिन की बात है। जनता को परेशानी नहीं होनी चाहिए।
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