Monday, 8 February 2016

पीडीपी की बैठक में महबूबा मुफ्ती ने बीजेपी पर निशाना साधा

पीडीपी की बैठक में महबूबा मुफ्ती ने बीजेपी पर निशाना साधा

श्रीनगर:  पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने रविवार को श्रीनगर में अपनी पार्टी के नेताओं को 45 मिनट तक संबोधित किया. पूरा भाषण भावनात्मक था लेकिन ऐसा कोई नहीं था, जिसने उसका राजनीतिक अभिप्राय समझा न हो.

पार्टी की कोर ग्रुप की बैठक खत्म होने के बाद राज्यपाल एनएन वोहरा ने महबूबा मुफ्ती को फैक्स से संदेश भेजा. उसमें उन्होंने मंगलवार को जम्मू के राजभवन में महबूबा से मिलने की इच्छा जताई है.

पीडीपी की सहयोगी भाजपा और प्रतिद्वंद्वी नेशनल कान्फ्रेंस (नेकां) की तरह पीडीपी से भी वोहरा स्पष्ट रूप से यह संदेश पा चुके हैं कि महबूबा मुफ्ती जम्मू-कश्मीर में वर्तमान माहौल में नई सरकार बनाने के लिए तैयार नहीं हैं.

सरकार बनाने को लेकर भाजपा पर निशाना साधते हुए महबूबा ने अपनी पार्टी के नेताओं से कहा, “मैं अपनी अंगुलियां जलाने के लिए तैयार हूं लेकिन बिना मतलब के नहीं.”

श्रीनगर में रविवार को बुलाई गई पीडीपी नेताओं की बैठक विभिन्न मुद्दों के साथ राज्य में सरकार बनाने पर विचार करने के लिए भी थी.

अपने दिवंगत पिता और जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री रहे मुफ्ती मुहम्मद सईद के निधन के दुख को वह नहीं छुपा सकीं. अपने पिता को याद करते हुए उन्होंने कहा कि हमलोगों ने जनता से जो वादे किए थे, वे पिछले दस माह में पूरे नहीं हुए, मुफ्ती साहब पर वे भारी पड़े.

नई दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में मुफ्ती मुहम्मद सईद की विगत सात जनवरी को हुए निधन के बाद पहली बार पीडीपी नेता ने कहा कि उनके पिता की मौत दुख के कारण हुई.

महबूबा मुफ्ती ने कहा, “जब तक एम्स के गहन चिकित्सा कक्ष (आईसीयू) में बात करते रहे, मुफ्ती साहब मुझसे पूछते रहे कि क्या केंद्र सरकार ने जो राहत पैकेज देने का वादा किया था, उसे राज्य को जारी किया?”

महबूबा के शब्दों में- “मैंने कहा, हां. मैंने अपने पिता से झूठ बोला.”

पीडीपी के विधायकों और वरिष्ठ नेताओं का मत था कि पार्टी उस जनता के प्रति उत्तरदायी है, जिसने उसे बहुमत दिया हालांकि कि यह सरकार बनाने के लिए नाकाफी है. इस पर महबूबा ने अपने संबोधन में कहा कि मुफ्ती साहब ने भाजपा के साथ गठबंधन की सरकार बनाने का साहसपूर्ण, लेकिन अलोकप्रिय फैसला लिया, लेकिन इस गठबंधन ने अब तक अपना काम नहीं किया.

उन्होंने कहा, “मैं सरकार बनाने के खिलाफ नहीं हूं, लेकिन यह तभी होगा जब भारत सरकार समयबद्ध ढंग से गठबंधन के एजेंडे को लागू करने का भरोसा दे.”

पीडीपी अध्यक्ष ने कहा, “मेरे पिता के कंधे मजबूत थे. वह भारी बोझ उठा सकते थे. मेरे कंधे उनके जितने मजबूत नहीं हैं.”

आगे कहा, “यदि आप लोगों में से कोई अब भी यह महसूस करता है कि हम लोगों को हर हाल में सरकार बनानी चाहिए, जैसी पिछले दस माह से थी, तो आप अपनी इच्छा के लिए स्वतंत्र हैं. मैं मुफ्ती साहब के सपनों को अमलीजामा पहनाने के लिए अकेले संघर्ष शुरू करने के लिए तैयार हूं.”

नेशनल कांफ्रेंस में महबूबा के प्रतिद्वंद्वी इसे भाजपा पर दबाव डालने का तरीका करार दे रहे हैं. नेकां के दिग्गज नेता और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने एक बयान में कहा है, मोदी उन्हें कुछ नहीं देंगे.

विपक्षी दल के अन्य लोगों का कहना है कि यह पीडीपी और भाजपा की नूरा-कुश्ती है.

नेकां के एक वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री ने जम्मू में कहा, “मैं इस पर विश्वास करने के लिए तैयार नहीं हूं कि महबूबा सरकार नहीं बनाएंगी और लंबे समय तक ऐसे ही रहना पसंद करेंगी.”

इस बीच भाजपा नेतृत्व ने बगैर कुछ किए इंतजार करने और नजर रखने का निर्णय लिया है. इसकी वजह से पीडीपी के साथ उसके रिश्ते बिगड़ सकते हैं.

जम्मू में भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, “हम लोग पीडीपी के साथ गठबंधन करते हुए पहले ही एक एजेंडा पर हस्ताक्षर कर चुके हैं. लिखित दस्तावेज में और कौन सा आश्वासन दिया जाना है? हां, हम लोग इस बात से भी सहमत हैं कि समयबद्ध ढंग से उन्हें लागू किया जाना चाहिए.”

एजेंडे में यह पहले ही कहा जा चुका है कि पीडीपी-भाजपा के शासन का जो एजेंडा है उसे सरकार द्वारा छह वर्षो में लागू किया जाना है. और किसी आश्वासन की जरूरत क्या है?

नई दिल्ली में भाजपा के सूत्रों ने  बताया है कि इसकी बहुत कम संभावना है कि प्रधानमंत्री या भापजा अध्यक्ष अमित शाह महबूबा मुफ्ती के बयान के जवाब में कोई घोषणा करेंगे.

इस तरह जम्मू-कश्मीर मध्यावधि चुनाव की ओर बढ़ रहा है? स्वाभाविक है कि इसका जवाब है- हां. जब तक पीडीपी और नेकां राज्य की राजनीति में अलग-अलग हैं और जम्मू-कश्मीर की जनता की समस्याओं को सुलझाने के लिए अपनी कटुता दफन कर एक-दूसरे के करीब आने का फैसला नहीं करते, स्थिति ऐसी ही रहेगी. मुफ्ती मुहम्मद सईद सही कहा करते थे, राजनीति असंभव परिस्थितियों में भी संभावना तलाशने की कला है.

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