Wednesday, 10 August 2016

ये चीन है कि मानता नहीं, भारत की व्यापारिक वीजा नीति पर ऐतराज

चीन की नापाक चाल अब दुनिया के सामने है। चीन को अब भारत की व्यापारिक वीजा नीति पर ऐतराज है।

बीजिंग। अंतरराष्ट्रीय जगत में चीन की नीति पर एक राय ये है कि वो अपनी सुविधा के हिसाब से नियम-कानून को मानता है। नियम-कानून की आड़ में वो एनएसजी में भारत की सदस्यता का विरोध करता है, तो दूसरी तरफ वो दक्षिण चीन सागर पर अंतरराष्ट्रीय फैसले को मानने से इनकार करता है। दक्षिण चीन सागर पर अपने खिलाफ गए फैसले की खीझ वो भारत पर उतारता है।

भारत के खिलाफ कभी चीन सरकार तीखे लफ्जों का इस्तेमाल करती है। वहीं चीन की सरकारी मीडिया भी भारत के खिलाफ अनाप-शनाप बोलने में पीछे नहीं है। चीन के व्यापारियों के लिए भारत सरकार द्वारा वीजा नीति की चीनी मीडिया ने कड़ी आलोचना की है। सरकार द्वारा संचालित ग्लोबल टाइम्स ने 'पेन इन बट' जैसे लफ्ज का इस्तेमाल किया है जो चीन की भावना को बताने के लिए पर्याप्त है।

पेपर में लिखा गया है कि चीन का व्यापारी समुदाय भारत में पारित जीएसटी की प्रशंसा कर रहा है। लेकिन बिजनेस वीजा पॉलिसी के द्वारा आखिरकार भारत क्या हासिल करना चाहता है। पेपर में कहा गया है कि भारत वीजा नीति द्वारा चीन को घेरने की कोशिश कर रहा है लेकिन उसका ये हथियार उसके खिलाफ ही जाएगा।

ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है कि भारत ये सब सिर्फ इसलिए कर रहा है कि वो एनएसजी के मुद्दे पर चीन को गुनहगार मानता है। भारत ने शिन्हुआ के लिए काम करने वाले तीन पत्रकारों की वीजा अवधि की नवीनीकरण से इनकार कर दिया था। भारत सरकार का आरोप था कि ये पत्रकार छद्म नामों से संवेदनशील जगहों के बारे में जानकारियां इकठ्ठा कर रहे थे। इसके अलावा अनधिकृत तौर पर वे सरकारी विभागों में जानकारी इकठ्ठा करने की कोशिश कर रहे थे।

ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है कि पत्रकारों पर लगाए गए आरोप बेबुनियाद हैं। एनएसजी में नाकामी की खीझ भारत इस तरह से निकाल रहा है। आप वीजा देने के मामले में अलग-अलग तरीके की नीति कैसे बना सकते हैं। जो आपके लिए फायदेमंद हो वहां आप नियम कानूनों में छूट दें और जो आपके मनमुताबिक न हों वहां आप जटिल नियम बनाएं।

Courtesy: jagran. Com

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