आतंकी बुरहान वानी के एनकाउंटर के बाद घाटी की ताजा हालात पर चर्चा करने के लिए उमर अबदुल्ला ने पीएम से मुलाकात की।
नई दिल्ली। नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेता और जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला ने पैलेट गन के इस्तेमाल पर जल्द रोक लगाने की मांग की। उन्होंने कहा कि कश्मीर में शांति बहाली के लिए केंद्र सरकार को सभी पक्षों से बातचीत करने की जरूरत है। उमर ने कहा कि इस मौके पर किसी तरह के दोषारोपण से बचने की जरूरत है। वो किसी के आरोप लगाने नहीं आए हैं। कश्मीर में शांति बहाली घाटी के साथ-साथ भारत के लिए जरूरी है। किसी भी शख्स या राजनीतिक दल को कश्मीर को राजनीति का अखाड़ा बनाने से बचना चाहिए।
पीएम-उमर की मुलाकात
उमर अबदुल्ला की अगुवाई में वहां के विपक्षी नेताओं के प्रतिनिधिमंडल ने पीएम मोदी से साउथ ब्लॉक में मुलाकात की। उमर ने कहा कि राज्य में अगर हालात पर तत्काल नियंत्रण नहीं पाया गया तो कश्मीर के युवाओं में अलगाव की भावना और पनपेगी।
बता दें कि घाटी में हिंसा के चलते सुरक्षा बलों ने पैलेट गनों का इस्तेमाल किया था, जिस वजह से कई लोग घायल हुए हैं। साथ ही प्रतिनिधिमंडल ने घाटी में शांति बहाल करने के लिए पीएम से सभी उपयुक्त कदम उठाने का भी अनुरोध किया।
कश्मीर मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
कश्मीर मामले में एक याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कश्मीर के मुद्दे को राजनीतिक तौर से सुलझने की जरूरत है। इस तरह के मुद्दों को न्याय की चौखट तक लाने से बचने की जरूरत है। कोर्ट ने कहा कि याची भीम सिंह को इस मामले में पीएम से मिलकर शिकायत और सुझाव देना चाहिए।
पिछले 45 दिन से घाटी अशांत
आतंकी बुरहान वानी के सफाए के बाद घाटी पिछले 45 दिन से अशांत है। श्रीनगर में कर्फ्यू जारी है। इस बीच नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने कल राष्ट्रपति से मुलाकात की थी । उन्होंने कहा कि जिस काम को सरकार को करना चाहिए उसे विपक्ष कर रहा है। कश्मीर में आग अपनों की नाकामियों से लगी है। उसके लिए किसी और को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं होगा।
उमर ने कहा कि ये सच है कि आग में घी डालने का काम अलगाववादी करते हैं। लेकिन ये समझने की जरूरत है कि कश्मीर अशांत क्यों है। उमर ने कहा कि पाकिस्तान के ट्रैक रिकॉर्ड के बारे में दुनिया जानती है। ये सरकार की जिम्मेदारी है कि वो आतंक के प्रायोजक का सामना करे। लेकिन जिस तरह से कश्मीर में युवाओं को निशाना बनाया जा रहा है, वो चिंता का विषय है।
वहीं गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा था कि सरकार को सिर्फ कश्मीर की जमीन से मतलब नहीं है। सरकार आम कश्मीरियों से प्यार कर सकती है। सरकार की स्पष्ट सोच है कि युवाओं के हाथ में बंदूक और पत्थर की जगह कलम, किताब और कंप्यूटर होना चाहिए।
Courtesy:jagran. Com
No comments:
Post a Comment